NHRC (National Human Rights Commission) ने अब प्राइवेट स्कूलों को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। काफी समय से पैरेंट्स की शिकायतें आ रही थीं कि स्कूल बच्चे को महंगी किताबें (expensive books) खरीदने के लिए मजबूर करते हैं और कुछ जगह तो खास दुकानों से ही सामान लेने का दबाव भी बनाया जाता है।
अब NHRC ने साफ कर दिया है कि इस पूरे मामले में सभी राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को 30 दिन के अंदर रिपोर्ट (NHRC 30 days notice) देनी होगी और बताना होगा कि इस पर क्या एक्शन लिया गया है।
अब सिर्फ NCERT और SCERT किताबें ही चलेंगी
नए नियम के मुताबिक अब स्कूलों में सिर्फ NCERT और SCERT books ही पढ़ाई जाएंगी। मतलब अब कोई भी प्राइवेट स्कूल अपनी मनमर्जी से अलग-अलग या महंगी किताबें नहीं थोप पाएगा। इससे सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि:
- स्कूल की पढ़ाई का खर्च कम होगा
- पैरेंट्स पर जो पैसों का बोझ था वो घटेगा
- और पढ़ाई पहले से ज्यादा आसान हो जाएगी
दुकान और यूनिफॉर्म पर भी रोक
NHRC ने ये भी साफ कहा है कि अब कोई भी स्कूल ये नहीं बोल सकता कि:
- ‘यहीं से किताबें लो’
- या ‘इसी दुकान से uniform और stationery खरीदो’
अब पैरेंट्स अपनी मर्जी से कहीं से भी सामान खरीद सकते हैं। मतलब अब forced buying system बंद होने वाला है।
ये फैसला आया क्यों?
असल में मामला तब बिगड़ा जब लगातार शिकायतें आने लगीं कि:
- स्कूल महंगी किताबें थोप रहे हैं
- कुछ जगह commission system चल रहा है
- और पैरेंट्स को बिना जरूरत extra पैसे देने पड़ रहे हैं
NHRC ने इसे seriously लिया और कहा कि ये कहीं न कहीं बच्चों और पैरेंट्स के साथ educational discrimination जैसा है।
आगे सरकार क्या करेगी?
सरकार अब इस बात पर नजर रखेगी कि स्कूल ये नए नियम सही से फॉलो कर रहे हैं या नहीं। अगर कोई स्कूल नियम तोड़ता है तो उसके खिलाफ सख्त action लिया जाएगा। पैरेंट्स चाहें तो इसकी शिकायत भी कर सकते हैं। अब पूरा सिस्टम धीरे-धीरे कंट्रोल में लाया जाएगा।
अगर कोई स्कूल नहीं मानेगा तो?
अगर कोई स्कूल फिर भी महंगी किताबें थोपता है तो उस पर कार्रवाई हो सकती है। इससे स्कूलों की मनमानी पर रोक लगने की पूरी उम्मीद है। पैरेंट्स को अब ज्यादा freedom मिलेगी और बेवजह का extra खर्च भी कम होगा।
सिस्टम में आएगी पारदर्शिता
अब धीरे-धीरे education system में transparency आने लगेगी। किताबों का पूरा system एक जैसा करने की कोशिश होगी। इससे बच्चों की पढ़ाई आसान हो जाएगी और पैरेंट्स पर financial burden भी कम होगा।
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