Petrol-Diesel New Update: भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमते बढ़ने से देशवासियों की जेब पर सबसे अधिक असर पड़ रहा है। ऐसे में अब भारत सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती का बड़ा फैसला लिया है। इसके लिए केंद्र सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं, जिसके अनुसार नई दरें 1 जून 2026 से लागू होंगी।
बता दें कि सरकार के इस फैसले से तेल कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
पेट्रोल-डीजल पर कितनी घटी एक्सपोर्ट ड्यूटी?
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक पेट्रोल पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी में 1.50 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। वहीं डीजल पर यह कटौती 13.50 रुपये प्रति लीटर की गई है। इसके अलावा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को भी 9.50 रुपये प्रति लीटर घटाया गया है। नई दरें 1 जून से प्रभावी होंगी और इसका सीधा असर तेल कंपनियों की लागत और निर्यात गतिविधियों पर दिखाई दे सकता है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में हाल के दिनों में नरमी देखने को मिली है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती का निर्णय लिया है। सरकार का उद्देश्य देश में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। साथ ही तेल कंपनियों को भी राहत देना है ताकि वे घरेलू बाजार और निर्यात दोनों के बीच बेहतर संतुलन बना सकें। गौरतलब है कि इससे पहले 16 मई को भी सरकार ने एक्सपोर्ट ड्यूटी की दरों में संशोधन किया था।
आज नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम
वहीं, 31 मई 2026 रविवार के दिन देश की प्रमुख तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। इससे पहले बीते सप्ताह पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि की गई थी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है, जबकि डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है।
मई महीने के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।

कई शहरों में 110 रुपये के पार पहुंचा पेट्रोल
देश के कई बड़े शहरों में पेट्रोल की कीमत 110 रुपये प्रति लीटर से अधिक हो चुकी है। हैदराबाद में पेट्रोल का रेट करीब 115 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं कोलकाता सहित कई अन्य शहरों में भी पेट्रोल 110 रुपये के आसपास बिक रहा है। मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों (International Market Prices) पर दबाव बना हुआ है। इसका असर भारत समेत कई देशों के ईंधन बाजार पर भी देखने को मिल रहा है।
क्या होती है एक्सपोर्ट ड्यूटी?
एक्सपोर्ट ड्यूटी को हिंदी में निर्यात शुल्क कहा जाता है। यह एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर होता है, जिसे केंद्र सरकार निर्यात किए जाने वाले सामान पर लगाती है। जब कोई कंपनी भारत में निर्मित वस्तुओं या उत्पादों को विदेशों में बेचती है, तो उस पर सरकार द्वारा जो टैक्स लगाया जाता है, उसे एक्सपोर्ट ड्यूटी कहा जाता है। यह सरकार के राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी माना जाता है।
एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाने का उद्देश्य क्या है?
सरकार केवल राजस्व बढ़ाने के लिए ही एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं लगाती, बल्कि इसका एक बड़ा उद्देश्य घरेलू बाजार में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी होता है। जब किसी उत्पाद की देश में मांग बढ़ जाती है या उसकी कमी होने लगती है, तब सरकार उस पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा देती है। इससे कंपनियों के लिए विदेशों में माल भेजना महंगा हो जाता है और वे घरेलू बाजार में अधिक आपूर्ति करने के लिए प्रेरित होती हैं। इसके अलावा जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी वस्तु की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तब घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए भी एक्सपोर्ट ड्यूटी का इस्तेमाल किया जाता है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती का सीधा फायदा फिलहाल उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा, क्योंकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें (Retail Prices of Petrol-Diesel) कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं। हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं और आपूर्ति की स्थिति बेहतर होती है, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
सरकार के इस फैसले को ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर इसका कितना असर पड़ता है।
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