Lucknow Fire Incident: रिहायशी नक्शे पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, इमरजेंसी एग्जिट तक नहीं, 15 मौतों के बाद LDA पर उठे सवाल

Lucknow Fire Incident: रिहायशी नक्शे पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स

Lucknow Fire Incident: यूपी जिले के लखनऊ में अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हैं। आग की इस घटना ने न केवल कई परिवारों की खुशियां छीन लीं, बल्कि भवन सुरक्षा व्यवस्था और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बता दें कि इस घटना की प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे काफी चौंकाने वाले हैं। जिस इमारत में आग लगी, उसका नक्शा आवासीय भवन (Residential Building Plan) के रूप में स्वीकृत कराया गया था, लेकिन बाद में वहां बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने लगीं। हैरानी कर देने वाली बात यह है कि सालों तक इस बदलाव पर किसी भी तरह के प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

इस घटना में 15 लोगों की दर्दनाक मौत

अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने के बाद इमारत में मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। लेकिन भवन में पर्याप्त और सही तरह के सुरक्षा इंतजाम नहीं होने के कारण कई लोग धुएं और आग के बीच फंस गए। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस हादसे में कुल 21 से 22 लोगों को अस्पताल लाया गया था, जिनमें से 15 लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। मृतकों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं और अधिकांश की उम्र 20 से 24 वर्ष के बीच बताई जा रही है। इस दर्दनाक घटना में घायल हुए लोगों का इलाज अस्पताल में जारी है। कुछ लोग जान बचाने के लिए इमारत से कूद गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई हैं।

रिहायशी नक्शे पर चलता रहा कमर्शियल संचालन

मिली जानकारी के अनुसार, यह भवन वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और उनके परिवार से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। LDA के रिकॉर्ड में यह संपत्ति वीरेंद्र शुक्ला के साथ सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला के नाम दर्ज है।

बताया जा रहा है कि भवन का मूल नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। हालांकि वर्ष 2014 के बाद से यहां व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गईं और धीरे-धीरे यह एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स (Commercial Complex) की तरह इस्तेमाल होने लगा। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भवन संचालन के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं।

न इमरजेंसी एग्जिट, न बचने का दूसरा रास्ता

हादसे के बाद सामने आए तथ्यों में सबसे गंभीर बात भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। जानकारी के मुताबिक इमारत में आपातकालीन निकास द्वार यानी इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit) मौजूद नहीं था। इसके अलावा भवन के पीछे की ओर भी बाहर निकलने का कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं था।

जब आग तेजी से फैली और धुआं पूरे भवन में भर गया तो लोग बाहर निकलने के लिए रास्ता तलाशते रहे। कई लोग पीछे की ओर भागे लेकिन वहां भी कोई सुरक्षित निकास नहीं मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि धुएं के कारण दम घुटने से कई लोगों की मौत हुई।

खिड़कियों से रस्सियों के सहारे बचाई जान

घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में लोग खिड़कियों और ऊपरी मंजिलों से रस्सियों, तारों और अन्य साधनों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोग अपनी जान बचाने में सफल रहे, जबकि कई लोग धुएं और आग की चपेट में आ गए। वीडियो देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हादसे के दौरान इमारत के अंदर कितना भयावह माहौल रहा होगा।

शॉर्ट सर्किट से लगी आग की आशंका

इस घटना की शुरुआती जांच से पता चला है कि आग लगने की शुरुआत बेसमेंट में लगे एयर कंडीशनर (AC) में हुए शॉर्ट सर्किट से हुई। इसके बाद आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया। इस संदर्भ में अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। फायर विभाग (Fire Department) और अन्य जांच एजेंसियां तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश

हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का दौरा किया और अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए गए है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाएगी। उन्होंने साफ कहा है कि अगर किसी भी अधिकारी, इंजीनियर या भवन संचालक की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भवन की स्वीकृति और उसके बाद हुए उपयोग परिवर्तन की भी जांच की जा रही है।

LDA की भूमिका पर उठ रहे सवाल

इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल लखनऊ विकास प्राधिकरण (Lucknow Development Authority) की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है। यदि भवन का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था तो फिर वहां वर्षों तक व्यावसायिक गतिविधियां कैसे चलती रहीं? क्या नियमित निरीक्षण नहीं हुआ? क्या नियमों के उल्लंघन की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई? इन सवालों के जवाब अब जांच रिपोर्ट से ही सामने आएंगे। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने भवन सुरक्षा मानकों के पालन और सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

प्रशासन की तरफ से इस पूरे मामले की जांच बारीकी से शुरू कर दी है। मृतकों के परिजनों को सहायता देने और घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है। वहीं शहर के अन्य व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा जांच भी तेज किए जाने की संभावना है। लखनऊ का यह अग्निकांड एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भवन में इमरजेंसी एग्जिट, अग्निशमन उपकरण (Emergency Exit, Fire-Fighting Equipment) और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो शायद इतनी बड़ी जनहानि को रोका जा सकता था।

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