West Bengal UCC: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बंगालवासियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) और धर्मांतरण विरोधी कानून को सरकार लागू करके ही रहेगी। इस बात का ऐलान खुद शुभेंदु अधिकारी ने किया है। उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार राज्य की सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन को मजबूत करने के लिए जल्द ही इस दिशा में कदम उठाएं जाएंगे। बता दें कि मुख्यमंत्री ने यह अहम घोषणा ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में की।
अवैध घुसपैठ की वजह से धर्मांतरण, लव जिहाद मामले बढ़े
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से होने वाली अवैध घुसपैठ राज्य की सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा है। इनकी वजह से ही बंगाल में धर्मांतरण, लव जिहाद और जनसंख्या संतुलन में बदलाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। इस संदर्भ में उन्होंने साफ कहा है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए शुभेंदु सरकार (Subhendu Sarkar) सख्त कदम उठाएगी।
धर्मांतरण रोकने के लिए बनेगा सख्त कानून
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार राज्य में धर्मांतरण के खिलाफ कड़ा कानून लाएगी। उनका कहना था कि किसी भी प्रकार का जबरन या लालच देकर कराया जाने वाला धर्मांतरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। हमारी सरकार का उद्देश्य सभी नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि राज्य की संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है और इसी सोच के तहत धर्मांतरण विरोधी कानून (Anti-Conversion law) लागू किया जाएगा।
बंगाल में लागू होगी समान नागरिक संहिता (UCC)
मुख्यमंत्री ने यह भी साफ कहा है कि उनकी सरकार पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के पक्ष में है। बंगाल के सभी नागरिकों के लिए समान कानून होने से न्याय व्यवस्था मजबूत होगी और समाज में समानता को बढ़ावा मिलेगा। किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
सीमा सुरक्षा को लेकर सरकार का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा सके। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती जिलों में ऐसे लोगों की पहचान के लिए होल्डिंग सेंटर (Holding Center) बनाए गए हैं, जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते हैं। जिन लोगों की पहचान अवैध घुसपैठिए के रूप में होगी और जो भारत की सुरक्षा या संस्कृति के लिए खतरा बनेंगे, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत उनके मूल स्थान पर वापस भेजा जाएगा।
CAA के तहत आने वाले शरणार्थियों का किया जिक्र
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने अवैध प्रवासियों और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत आने वाले शरणार्थियों के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद भारत आने वाले हिंदू शरणार्थियों (Hindu Refugees) को घुसपैठिया नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे लोगों को कानून के अनुसार नागरिकता प्रदान की जाएगी। सरकार उन लोगों के साथ खड़ी है, जो धार्मिक प्रताड़ना से बचने के लिए भारत आए हैं, जबकि अवैध तरीके से प्रवेश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
‘वंदे मातरम’ को बताया राष्ट्रीय एकता का प्रतीक
वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ (150th Anniversary of Vande Mataram) पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इस गीत को देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि देशवासियों के लिए प्रेरणा और राष्ट्रभक्ति का संजीवनी मंत्र है।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा
मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति (Politics of West Bengal) में नई बहस शुरू हो गई है। UCC और धर्मांतरण विरोधी कानून जैसे मुद्दे पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहे हैं। अब बंगाल में इन दोनों कानूनों को लागू करने के बाद राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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