Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक ने आज यानी बुधवार को 25 दिन की भूख हड़ताल के बाद मेदांता अस्पताल से एक वीडियो जारी किया है, जिसके माध्यम से उन्होंने अपना खास संदेश जनता व सरकार तक पहुंचाया है। वीडियो में उन्होंने कहा है कि “अभी भी जिंदा हूं”, लेकिन लगातार अनशन के कारण स्वास्थ्य काफी कमजोर हो गया है। उन्होंने यह भी कहा है कि अनशन के चलते उनका करीब 11 किलो वजन कम हो गया है।
बता दें कि उन्होंने अपने संदेश में साफ तौर पर कहा है कि अगर मोदी सरकार (Modi Government) उनकी एक अहम मांग मान लेती है, तो वह अपना अनशन तुरंत समाप्त करने के लिए तैयार हैं।
अस्पताल से जारी किया वीडियो संदेश
मेदांता अस्पताल (Medanta Hospital) से जारी वीडियो में सोनम वांगचुक ने कहा कि लंबे समय से चल रहे अनशन का असर उनके स्वास्थ्य पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे फिलहाल अभी काफी कमजोरी महसूस हो रही है, लेकिन मेरा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने उन सभी लोगों का धन्यवाद किया जिन्होंने इस आंदोलन के दौरान उनका साथ दिया और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
वांगचुक ने यह भी कहा है कि उनका उद्देश्य किसी से टकराव करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था (Education System) में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि वे आगे भी युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए काम करना चाहते हैं।
ABHI BHI ZINDA HUN…. DAY 25 pic.twitter.com/SnwKXMfvOO
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 22, 2026
अनशन खत्म करने के लिए रखी शर्त
सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि अगर भारत सरकार (Indian Government) आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने का लिखित आश्वासन देती है, तो वे अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य को खतरे में डालकर वे अपना आंदोलन खत्म नहीं करना चाहते। यदि सरकार प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा की गारंटी देती है, तभी वे अपना अनशन तोड़ेंगे। अन्यथा उनका अनिश्चितकालीन अनशन (Indefinite Hunger strike) जारी रहेगा।
सोनम वांगचुक ने छात्रों की सुरक्षा पर दिया जोर
वांगचुक ने अपने पत्र में भारत सरकार ( Bharat Sarkar) से अपील की कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं का किसी भी तरह से उत्पीड़न न किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र पर मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए और उन्हें परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी दावा किया है कि देश के कई बड़े राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उनसे संपर्क किया है और अनशन समाप्त करने की अपील की है, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में मना कर दिया, और कहा कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हुए बिना वे अपना फैसला किसी भी हालात पर नहीं बदलेंगे।
सरकार को लिखे पत्र में उठाईं अपनी मांगें
सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने अपने पत्र में सरकार के सामने दो बड़ी अहम मांगें सामने रखीं है। खबरों के अनुसार, उनकी पहली मांग- पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित उन परिवारों को उचित मुआवजा देने की है, जिनके बच्चों ने कथित तौर पर आत्महत्या की।
दूसरी मांग- संसद में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर चर्चा की जाए। उन्होंने कहा है कि शिक्षा व्यवस्था (Education System) में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अगर इस दिशा में सख्त कदम नहीं उठाए गए तो युवाओं का भरोसा कमजोर होगा और भविष्य भी गलत रहा पर होगा।
AN APPEAL TO THE GOVERNMENT
regarding breaking my fast…
Once the assurance from govt come I will also appeal to the peacefully protesting students to halt the movement for now and enter into dialogue with the government pic.twitter.com/gR6S8woF5R— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 22, 2026
‘चलो संसद’ मार्च को बताया शांतिपूर्ण
वहीं, वांगचुक ने यह भी कहा है कि 20 जुलाई को आयोजित किया गया ‘चलो संसद’ (Chalo Sansad) मार्च बेहद शांतिपूर्ण था, उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने मोदी सरकार (Modi Government) से भविष्य में लोकतांत्रिक आंदोलनों के दौरान संयम बरतने की अपील की। उनका कहना है कि अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है।
लोकतंत्र और युवाओं के भविष्य की चिंता
अपने संदेश के अंत में सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने कहा कि देश का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार युवाओं की आवाज को किस तरह सुनती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करना कोई अपराध नहीं है और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
इसके अलावा, उन्होंने कहा है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ (Political Gain) के लिए नहीं, बल्कि देश के छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बेहतर भविष्य के लिए है। ऐसे में उन्होंने उम्मीद है कि भारत सरकार जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी ताकि बातचीत के जरिए इस मुद्दे का समाधान निकले।
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