National Flag: दिल्ली में 115 फुट ऊँचे तिरंगे पर उठे सवाल, देश के सम्मान के साथ बड़ी लापरवाही, फटे झंडे पर प्रशासन घिरा

National Flag: दिल्ली में 115 फुट ऊँचे तिरंगे पर उठे सवाल

National Flag: राजधानी दिल्ली में जीटीबी एन्क्लेव थाना के सामने लगे 115 फुट ऊँचे विशाल तिरंगे झंडे को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में यह साफ दिख रहा है कि इतनी ऊँचाई पर लगा तिरंगा झंडा फटा हुआ है। इस घटना के बाद न केवल स्थानीय नागरिकों में नाराज़गी देखने को मिल रही है, बल्कि इसके रखरखाव और खर्च को लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, यह विशाल राष्ट्रीय ध्वज क्षेत्र की पहचान और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया था। बताया जाता है कि इस परियोजना पर शुरुआती निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, जबकि इसके नियमित रखरखाव पर भी हर महीने बड़ी राशि खर्च होने की बात कही जाती है।

115 फुट तिरंगे की भव्यता और उद्देश्य

यह 115 फुट ऊँचा तिरंगा झंडा अपने आप में एक आकर्षण का केंद्र माना जाता है। इसे इस उद्देश्य से लगाया गया था कि राष्ट्रीय भावना को बढ़ावा मिले और लोग इसे देखकर गर्व महसूस करें। दूर-दूर से लोग इस झंडे को देखने आते हैं और यह स्थान एक तरह से स्थानीय पहचान बन चुका है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, ऐसे बड़े झंडों का रखरखाव बेहद चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि ऊँचाई अधिक होने के कारण हवा, बारिश और धूल का सीधा प्रभाव पड़ता है।

फटे तिरंगे की तस्वीरें वायरल

हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें सामने आईं, जिनमें तिरंगा झंडा आंशिक रूप से फटा हुआ दिखाई दिया। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद लोगों ने इस पर नाराजगी जताई है। नागरिकों का कहना है कि जब इतनी बड़ी राशि इस परियोजना पर खर्च की गई है, तो इसके रखरखाव में इतनी लापरवाही कैसे हो सकती है। कुछ लोगों ने इसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान भी बताया है, जबकि कुछ का कहना है कि यह केवल मौसम और रखरखाव की कमी का परिणाम है।

लागत और मेंटेनेंस पर उठे सवाल

स्थानीय चर्चाओं में यह भी दावा किया जा रहा है कि इस तरह के 115 फुट ऊँचे झंडे को लगाने में 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। हालांकि आधिकारिक रूप से इस आंकड़े की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोग लगातार इसके खर्च को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इसके अलावा, हर महीने मेंटेनेंस पर लाखों रुपये खर्च होने की बात भी सामने आ रही है। इसके बावजूद झंडे की वर्तमान स्थिति ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वहीं, स्थान नागरिकों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और समय पर मरम्मत की व्यवस्था होती, तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे तकनीकी समस्या और प्राकृतिक कारणों का परिणाम बता रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि, “इतने बड़े झंडे का सम्मान बनाए रखना बहुत जरूरी है। अगर यह फट गया है तो तुरंत बदलना चाहिए।” वहीं एक अन्य नागरिक ने कहा कि, “अगर हर महीने लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, तो फिर ऐसी स्थिति कैसे बन रही है, यह जांच का विषय है।”

प्रशासन की जिम्मेदारी और अपेक्षाएं

बताया जा रहा है कि दिल्ली में राष्ट्रीय प्रतीक की देखभाल केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे नियमित तकनीकी निरीक्षण और रखरखाव प्रणाली के तहत रखा जाना चाहिए। झंडे की ऊँचाई और खुली जगह होने के कारण इसमें तेज हवाओं और मौसम का प्रभाव अधिक पड़ता है, इसलिए समय-समय पर कपड़े की गुणवत्ता और संरचना की जांच आवश्यक होती है।

राष्ट्रीय प्रतीक का सम्मान

तिरंगा झंडा केवल एक कपड़ा नहीं बल्कि देश की अस्मिता और सम्मान का प्रतीक है। ऐसे में उसकी स्थिति को लेकर कोई भी लापरवाही जनता की भावनाओं को प्रभावित करती है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले में तुरंत कार्रवाई करे और झंडे को ठीक या प्रतिस्थापन सुनिश्चित करे, ताकि राष्ट्रीय प्रतीक की गरिमा बनी रहे।

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