US Middle East Tension: पिछले कुछ दिनों से मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध ने हालात काफी गंभीर बना दिए हैं। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर वह रह रहे आम नागरिकों पर पड़ रहा है। इस युद्ध में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी फंस हैं, जो काम, पढ़ाई (Indian Students Abroad) या व्यवसाय के सिलसिले में अपनें घरों व देश से दूर इन देशों में रह रहे हैं। ऐसे में लगातार हवाई हमलों और सुरक्षा खतरों के बीच युद्ध इलाकों में रह रहें भारतीयों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भावुक अपील (PM Modi Help Appeal) की है-“मोदी जी, हमें बचाइए।”
सोशल मीडिया पर मदद की गुहार
मिडिल ईस्ट में फंसे कई भारतीयों ने अपनी सुरक्षा (Indian Citizens Safety) को लेकर सोशल मीडिया और वीडियो मैसिज के जरिए अपनी पीड़ा साझा की है, जिसमें उनका कहना है कि युद्ध के कारण कई इलाकों में दहशत का माहौल है। बम धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं और सामान्य जीवन पूरी तरह ठप हो गया है। बताया जा रहा है कि उनकी फ्लाइट्स भी रद्द हो चुकी हैं, जिससे भारत लौटना फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है।
रोजी-रोटी और सुरक्षा दोनों पर संकट
इस भीषण युद्ध के कारण कई जगहों पर दफ्तर, निर्माण स्थल और व्यावसायिक गतिविधियां बंद हो गई हैं। इससे वहां काम कर रहे भारतीयों के सामने रोजी-रोटी का भी एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। परिवारों के साथ रह रहे लोगों के लिए हालात और भी चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।

विदेश मंत्रालय अलर्ट, हेल्पलाइन जारी
इस युद्ध की स्थिति व गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) ने तुरंत अहम कदम उठाए हैं। मंत्रालय ने मिडिल ईस्ट के कई देशों के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी जारी की हैं, ताकि जरूरतमंद भारतीय नागरिक तुरंत संपर्क कर सकें। MEA ने साफ कहा है कि सभी भारतीय दूतावास पूरी तरह अलर्ट पर हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
भारतीय नागरिकों के लिए सरकार की सलाह
विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि सुरक्षित स्थानों पर रहें। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, बिना जरूरी कारण यात्रा न करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत दूतावास या हेल्पलाइन से संपर्क करें।
मिडिल ईस्ट के इन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जिनके नाम- संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन और ईरान शामिल हैं। इन देशों में लाखों भारतीय निर्माण, स्वास्थ्य, आईटी और अन्य क्षेत्रों में काम करते हैं।
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