UP Board New Rule 2026: यूपी बोर्ड का सख्त फैसला, 9वीं-12वीं में अब सिर्फ सरकारी किताबें अनिवार्य, इन्हीं से होगी पढ़ाई

UP Board New Rule 2026

UP Board New Rule 2026: यूपी सरकार ने बच्चों की शिक्षा में सुधार को देखते हुए एक अहम दिशा-निर्देश दिए है। दरअशल, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और एकरूपता लाने के लिए राज्य सरकार के नियमों के तहत एक बड़ा कदम उठाया है। बताया जा रहा है कि बोर्ड ने सत्र 2026-27 के लिए नया आदेश जारी कर दिया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि प्रदेश में अब से कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक सिर्फ अधिकृत और मान्यता प्राप्त किताबों से ही बच्चों की पढ़ाई कराई जाएगी। राज्य सरकार का यह फैसला सिर्फ सरकारी स्कूल ही नहीं, बल्कि इसका असर प्रदेश के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों (Private Schools) को मानना होगा, अन्यथा सरकार के द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बोर्ड के अनुसार, प्रदेश के कई स्कूलों में महंगी और गैर-मान्यता प्राप्त किताबें (Unrecognized books) छात्रों पर थोपी जा रही थीं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। इसी समस्या को खत्म करने के लिए राज्य में यह सख्त निर्णय लेने की जरूरत पड़ी है।

यूपी की किन कक्षाओं में क्या बदला?

(Uttar Pradesh Board of Secondary Education) उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के अनुसार जारी किए गए नए आदेश के तहत कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए अंग्रेजी, गणित और विज्ञान विषयों की केवल अधिकृत किताबें ही अनिवार्य होंगी। वहीं, कक्षा 11 और 12 के लिए कुल 36 विषयों की निर्धारित पुस्तकों को लागू किया गया है।

पूरे उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (National Council of Educational Research and Training) की लगभग 70 किताबों को पढ़ाई के लिए अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों के लिए 12 चयनित पुस्तकें भी शामिल की गई हैं।

गैर-मान्यता प्राप्त किताबों पर सरकार की सख्ती

यूपी बोर्ड ने यह भी साफ कहा है कि प्रदेश के किसी भी स्कूल में अनधिकृत या गैर-मान्यता प्राप्त किताबें पाई जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह सरकारी आदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम (Intermediate Education Act) के तहत जारी किया गया है, जिससे इसकी कानूनी मजबूती भी बढ़ जाती है।

यह भी बताया जा रहा है कि जिला और मंडल स्तर के अधिकारियों को इस आदेश की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। स्कूलों में समय-समय पर जांच भी की जाएगी, ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

9वीं से 12वीं तक अब सिर्फ सरकारी किताबों से ही होगी पढ़ाई
9वीं से 12वीं तक अब सिर्फ सरकारी किताबों से ही होगी पढ़ाई

निजी स्कूल भी दायरे में बड़ा बदलाव

यूपी में इस बार शिक्षा को लेकर सबसे बड़ा बदलाव यह है कि यह नियम केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निजी स्कूलों को भी इसका पालन करना अनिवार्य होगा। इससे सभी छात्रों के लिए एक समान शिक्षा प्रणाली लागू होगी, ताकि छात्रों को सही शिक्षा और उनका भविष्य उज्जवल (Future Bright) हो सके।

यूपी में सस्ती दरों पर मिलेंगी किताबें

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के अनुसार, यूपी के छात्रों और अभिभावकों को राहत देने के लिए अधिकृत किताबों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की योजना भी तैयार की गई है। किताबों के मुद्रण और वितरण के लिए तीन एजेंसियों को अधिकृत किया गया है, ताकि समय पर छात्रों समेत अन्य अभिभावकों को उचित दाम पर किताबें उपलब्ध हो सकें।

यूपी में शिक्षा को लेकर जागरूकता अभियान

यूपी शिक्षा बोर्ड (UP Education Board) ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी स्कूलों में ‘पुस्तक जागरूकता शिविरों’ का आयोजन किया जाएगा। इन सभी शिविरों के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों को सही और अधिकृत किताबों की जानकारी दी जाएगी, जिससे भ्रम की स्थिति खत्म हो सके।

क्या है यूपी शिक्षा बोर्ड का मकसद?

यूपी बोर्ड का उद्देश्य साफ है कि प्रदेश में शिक्षा को सरल, सस्ती और एक समान बनाना है। इससे न सिर्फ छात्रों पर आर्थिक बोझ कम होगा, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। ऐसे में यूपी बोर्ड का यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अगर पूरे प्रदेश में इस खास नियम का सही तरीके से पालन किया जाता है तो तो छात्रों को बेहतर और समान शिक्षा मिलेगी और साथ ही अभिभावकों को अनावश्यक खर्च से राहत मिलेगी।

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