Sathankulam Custodial Death Case: तमिलनाडु के चर्चित सथानकुलम कस्टोडियल किलिंग मामले में न्यायपालिका ने आज सोमवार को एक बहुत ही बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) की मदुरै बेंच ने इस मामले में दोषी पाए गए 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
बता दें कि अदालत ने इस घटना को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में रखते हुए कहा है कि यह मामला अत्यधिक क्रूरता और कानून के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण है, जिससे समाज में अलग संदेश जाता है।
पुलिस हिरासत में मौत (Death in Police Custody)
यह मामला साल 2020 में तमिलनाडु के Sathankulam से सामने आया था। यहां एक व्यापारी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। दोनों को 19 जून 2020 को कोविड-19 लॉकडाउन (COVID-19 lockdown) के नियमों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने अपनी दुकान तय समय के बाद भी खुली रखी थी। लेकिन हिरासत में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
थाने में रातभर टॉर्चर (Tortured Overnight in Police Station)
जांच में सामने आया कि पिता-पुत्र को थाने में पूरी रात बर्बर तरीके से पीटा गया। उन्हें गंभीर चोटें आईं और लगातार मारपीट के कारण उनकी हालत बिगड़ती चली गई। मेडिकल रिपोर्ट में ब्लंट फोर्स ट्रॉमा और भारी रक्तस्राव को मौत की वजह बताया गया।
इस घटना के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया। सोशल मीडिया (Social Media) से लेकर सड़कों तक लोगों ने पुलिस हिरासत में हो रही हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की।

CBI जांच में खुला सच (Truth Revealed in CBI Investigation)
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपी गई। सीबीआई की जांच में सामने आया कि यह अत्याचार अचानक नहीं बल्कि सोची-समझी कार्रवाई थी। जांच एजेंसी ने कोर्ट में कहा कि आरोपियों ने जानबूझकर क्रूरता दिखाई और कानून का दुरुपयोग किया, इसलिए उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। अदालत ने इस दलील को सही माना।
6 साल बाद आया बड़ा फैसला
करीब छह साल तक चले ट्रायल के बाद अदालत ने सभी 9 पुलिसकर्मियों को हत्या और अन्य धाराओं में दोषी करार दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला सामान्य अपराध नहीं है, बल्कि इसमें सत्ता का दुरुपयोग कर इंसानियत को कुचला गया है।
दोषी पुलिसकर्मियों में इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल शामिल हैं। एक आरोपी की ट्रायल के दौरान कोविड-19 से मौत हो चुकी है।
‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ क्यों माना गया केस?
अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि यह अपराध बेहद जघन्य है। पुलिस, जो लोगों की सुरक्षा के लिए होती है, उसी ने अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल किया।
‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ का मतलब होता है ऐसा अपराध, जिसमें क्रूरता और अमानवीयता की हद पार हो जाए और समाज को सख्त संदेश देने के लिए सबसे कठोर सजा जरूरी हो।
परिवार के लिए न्याय, समाज के लिए संदेश
मिली जानकारी के अनुसार, इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ी राहत भी माना जा रहा है। लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रहे परिवार को अब कोर्ट के फैसले से उम्मीद की किरण मिली है।
साथ ही, यह फैसला देशभर में पुलिस हिरासत में होने वाली घटनाओं पर एक सख्त संदेश भी देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है-चाहे वह कानून लागू करने वाली एजेंसी ही क्यों न हो।
पुलिस पर उठे कई बड़े सवाल
इस मामले के बाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि पुलिस हिरासत में लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। क्या निगरानी व्यवस्था मजबूत है? क्या पुलिस सुधारों की जरूरत है? ऐसे मामलों को रोकने के लिए कड़े नियमों के साथ-साथ उनकी सख्ती से पालन भी जरूरी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सथानकुलम कस्टोडियल किलिंग केस का यह फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था (Indian Judicial System) का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है, जो यह बताता है कि न्याय देर से मिल सकता है, लेकिन मिलता जरूर है।
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