Kashi Meat-Fish Shops Shift: काशी बाबा विश्वनाथ की नगरी, जिसे सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के लिए भी जाना जाता है। धर्म और आध्यात्म की इस पवित्र नगरी में आस्था और श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए नगर निगम के द्वारा एक बड़ा फैसला लिया गया है। दरअसल काशी शहर के अंदर संचालित मीट, मांस और मछली की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से बाहर करने को लेकर आदेश जारी किया गया है।
बता दें कि इस ऐतिहासिक फैसला को शनिवार को मैदागिन स्थित टाउनहाल भवन (Town Hall Building at Maidagin) में आयोजित नगर निगम की साधारण सभा की बैठक में सर्वसम्मति के साथ मंजूरी दे दी गई।
काशी शहर की स्वच्छता और धार्मिक महत्व में बढ़ा कदम
यह बड़ा फैसला महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में शहर की स्वच्छता, धार्मिक महत्व और पर्यटन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। नगर निगम का मानना है कि इस कदम से काशी की पारंपरिक छवि को और मजबूती मिलेगी तथा आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर वातावरण उपलब्ध होगा।
6 महीने में लागू होगी यह योजना
महापौर अशोक कुमार तिवारी का कहना है कि देश और विदेश से हर साल काशी नगरी में लाखों श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में शहर को अधिक सुव्यवस्थित और साफ-सुथरा बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगले छह महीनों के अंदर इस योजना को पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं, नगर निगम प्रशासन ने योजना के क्रियान्वयन की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं ताकि तय समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी की जा सके।
काशी से बाहर मीट-मछली के लिए 5 स्थान किए गए चिन्हित
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि काशी से मीट और मछली की दुकानों को स्थानांतरित करने के लिए शहर की बाहरी सीमा के पास पांच स्थानों का चयन किया गया है। इनमें रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर शामिल हैं।
नगर निगम का कहना है कि इन स्थानों का चयन आम लोगों समेत काशी में आने वाले भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है। इन क्षेत्रों तक पहुंच आसान है और यहां पर्याप्त जगह उपलब्ध है, जिससे कारोबारियों और ग्राहकों दोनों को किसी भी तरह के नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उन्हें इससे पहले के मुकाबले अच्छा लाभ प्राप्त होगा।

पर्यटन और धार्मिक पहचान को मिलेगा बढ़ावा
काशी को विश्व की सबसे प्राचीन जीवित नगरी में से एक माना जाता है। देखा जाए तो इस पवित्र नगरी में हर दिन हजारों-लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन (Darshan of Baba Vishwanath) करने आते हैं। नगर निगम का मानना है कि शहर के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों से मीट-मांस की दुकानों (Meat Shops) को हटाने से काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक छवि को और मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा शहर की स्वच्छता व्यवस्था में भी सुधार देखने को मिलेगा। नगर निगम का दावा है कि इससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा और शहर की सुंदरता बढ़ेगी।
कारोबारियों की समस्याओं पर भी हुई चर्चा
नगर निगम की बैठक के दौरान पार्षद गुलशन अली ने इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा है कि करीब एक वर्ष पहले भी इसी तरह का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन उसे अमल में नहीं लाया जा सका था। उन्होंने कहा कि सावन महीने के दौरान कई क्षेत्रों में मीट और मछली की दुकानों को बंद रखना पड़ता है, जिससे इस कारोबार से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यदि दुकानों को व्यवस्थित रूप से शहर के बाहर विकसित बाजारों में स्थानांतरित कर दिया जाता है, तो कारोबारियों को भी राहत मिलेगी और उनका व्यवसाय प्रभावित नहीं होगा।
नगर निगम ने दिया भरोसा
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने आश्वासन दिया कि मीट और मछली की दुकानों के लिए चयनित स्थानों पर आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। दुकानदारों को व्यवस्थित ढंग से स्थान उपलब्ध कराया जाएगा ताकि उनके कारोबार पर असर न होगा। उन्होंने कहा कि काशी में इस योजना का उद्देश्य किसी के रोजगार को प्रभावित करना नहीं है, बल्कि शहर के विकास और व्यवस्था को बेहतर बनाना है। नगर निगम सभी पक्षों से बातचीत कर सहमति के आधार पर इस योजना को लागू करेगा।
काशी के विकास की दिशा में बड़ा कदम
नगर निगम का यह फैसला काशी के शहरी विकास और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे शहर की पहचान और मजबूत होगी, स्वच्छता में सुधार आएगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
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