Trump Warning Iran: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता एक बार फिर तनाव के दौर में पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनियों और सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है। दरअसल ईरान ने साफ कहा है कि जब तक लेबनान में युद्धविराम नहीं होता, तब तक किसी अन्य मुद्दे पर आगे बातचीत नहीं की जाएगी।
मिली जानकारी के अनुसार, रविवार को हुई वार्ता के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान को लेकर सख्त बयान जारी किया। इसके तुरंत बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने विरोध दर्ज कराया और कुछ समय के लिए बैठक छोड़कर बाहर निकल गया।
फोटो सेशन में भी शामिल नहीं हुआ ईरान
सूत्रों के अनुसार, वार्ता शुरू होने से पहले दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक फोटो सेशन और हाथ मिलाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। ईरान के प्रमुख वार्ताकारों ने अमेरिकी पक्ष के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि धमकी भरे माहौल में सकारात्मक बातचीत संभव नहीं है। इसके बाद सीमित स्तर पर वार्ता शुरू हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच मतभेद साफ दिखाई दिए।
लेबनान युद्धविराम को बनाया मुख्य शर्त
ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मेहदी गोरबनजादेह ने कहा कि लेबनान में जारी संघर्ष समाप्त होना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक वहां पूर्ण युद्धविराम लागू नहीं होता, तब तक किसी भी अन्य विषय पर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता के बिना परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत या आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा का कोई मतलब नहीं है। इसी कारण तेहरान ने अगले दौर की वार्ता को लेबनान की स्थिति से जोड़ दिया है।
ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी
वार्ता के दौरान ही ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए कहा कि उसे लेबनान में सक्रिय अपने समर्थित समूहों को तुरंत रोकना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका पहले से भी अधिक कठोर कार्रवाई कर सकता है। इसके अलावा ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा और नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है। ट्रंप के इन बयानों को ईरान ने उकसावे वाली राजनीति करार दिया है।
ईरान ने दिया कड़ा जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी धमकियों का ईरान पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
गालिबाफ ने कहा कि यदि दबाव और धमकियों से परिणाम निकलते, तो अमेरिका को आज बातचीत की जरूरत ही नहीं पड़ती। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सशस्त्र बल किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
प्रतिबंधों में राहत पर बनी सहमति
तनाव के बावजूद वार्ता के पहले दौर में कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। ईरानी सूत्रों का दावा है कि ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में आंशिक राहत देने के मसौदे को अंतिम रूप दिया गया है। बताया जा रहा है कि आने वाले समय में तेल निर्यात से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में छूट दी जा सकती है। हालांकि, इस पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
इसके साथ ही विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड्स को जारी करने का मुद्दा भी वार्ता का प्रमुख हिस्सा रहा। ईरान लंबे समय से इन धनराशियों को वापस पाने की मांग करता रहा है।
परमाणु बम नहीं चाहता ईरान
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। उन्होंने दोहराया कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता और इस संबंध में आश्वासन देने को तैयार है।
उन्होंने यह भी कहा कि वार्ता से जुड़े कई बिंदुओं पर प्रगति हुई है और इसके परिणाम जल्द सामने आ सकते हैं। साथ ही उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शांति वार्ता की सफलता से सबसे ज्यादा असहज वही होंगे।
आगे की रणनीति क्या होगी?
स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत ने एक तरफ प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक मुद्दों पर उम्मीद जगाई है, तो दूसरी तरफ लेबनान संघर्ष और ट्रंप की चेतावनियों ने नई बाधाएं खड़ी कर दी हैं। फिलहाल ईरान का रुख साफ है कि लेबनान में युद्धविराम के बिना आगे की वार्ता संभव नहीं होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के रिश्तों की दिशा काफी हद तक मध्य पूर्व की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
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