El Nino Alert: देशभर में मौसम को लेकर एक बार फिर से अलर्ट जारी किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से जुड़े केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (CMFRI) ने अल नीनो के असर को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। IMD का कहना है कि समुद्र का तापमान लगातार बढ़ रहा है और आने वाले महीनों में इसका असर खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन पर भी साफ दिखाई दे सकता है।
अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो किसानों और मछुआरों दोनों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में मौसम विभाग के द्वारा जारी की गई लेटेस्ट अपडेट यहां पढ़ें…
मछुआरों की आजीविका पर पड़ सकता है असर
मौसम विभाग के अनुसार, समुद्र का तापमान बढ़ने से समुद्री पानी के गुणों में बदलाव होता है। इससे कई समुद्री जीवों का प्राकृतिक जीवन प्रभावित होता है। ऑयल सार्डिन (Oil Sardine) जैसी मछलियों की संख्या घटने से मछुआरों की आमदनी पर सीधा असर पड़ सकता है। कई तटीय क्षेत्रों में हजारों परिवार अपनी आजीविका के लिए समुद्री मत्स्य पालन (Marine Fisheries) पर निर्भर हैं। ऐसे में उत्पादन कम होने से आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
कोरल रीफ्स भी खतरे में
CMFRI ने यह भी कहा है कि अल नीनो (El Nino) का असर केवल मछलियों तक सीमित नहीं रहेगा। समुद्र का बढ़ता तापमान कोरल रीफ्स को भी नुकसान पहुंचा सकता है। कोरल रीफ्स समुद्री जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और अनेक समुद्री जीवों का प्राकृतिक आवास माने जाते हैं। यदि इनका क्षरण बढ़ता है तो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
किसानों के लिए क्यों चिंता का विषय है अल नीनो?
अल नीनो (El Nino) का असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा प्रभाव मौसम और मानसून पर भी पड़ता है। जब अल नीनो सक्रिय होता है तो भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही गर्मी और हीटवेव की घटनाएं भी अधिक देखने को मिलती हैं। कम बारिश होने पर सिंचाई की समस्या बढ़ती है और फसलों की पैदावार प्रभावित होती है।
मौसम विभाग का कहना है कि धान, मक्का, सोयाबीन, दालें और दूसरी खरीफ फसलें समय पर और पर्याप्त बारिश पर निर्भर रहती हैं। अगर मानसून (Monsoon) कमजोर रहता है तो इन फसलों का उत्पादन घट सकता है, जिससे किसानों की आय पर असर पड़ना तय है।
खरीफ फसलों की बुवाई में आई कमी
कृषि मंत्रालय (Ministry of Agriculture) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष खरीफ फसलों की बुवाई में कमी दर्ज की गई है। कुल 182.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 23 प्रतिशत कम बताई जा रही है। मौसम की अनिश्चितता और बारिश की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
किसानों और मछुआरों को दी जाएगी ट्रेनिंग
CMFRI ने कहा है कि बदलते मौसम के प्रभाव को देखते हुए किसानों और मछुआरों को जागरूक करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से संस्थान इस वर्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगा। इसमें मौसम के अनुसार खेती और मत्स्य पालन की नई तकनीकों (New Fish Farming Techniques) की जानकारी दी जाएगी ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
PMO भी कर रहा है हालात की निगरानी
अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हाल ही में तैयारियों की समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की गई, जिसमें मौसम, कृषि और खाद्य सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। सरकार का प्रयास है कि अगर अल नीनो का असर बढ़ता है तो किसानों और आम लोगों पर इसका प्रभाव कम से कम पड़े।
क्या है अल नीनो? (What is El Nino?)
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत में यह अक्सर कमजोर मानसून, कम बारिश और अधिक गर्मी की वजह बनता है। यही कारण है कि कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से अल नीनो को गंभीर चुनौती माना जाता है।
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