Breaking News: गुजरात के अहमदाबाद में आज 18 जुलाई, 2026 शनिवार का दिन दर्दनाक हादसे में बदल गया। दरअसल, पटाखा फैक्ट्री (Firecracker Factory) में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि इस भीषण हादसे में करीब 8 लोगों की जान चली गई है और साथ ही कई लोग घायल होने की खबर सामने आई है।
बता दें कि हादसे के बाद जांच से सामने आया है कि फैक्ट्री अवैध रूप से चलाई जा रही थी। ऐसे में आइए यहां विस्तार से जानते हैं कि क्या है पूरा मामला…
अचानक फैक्ट्री से धुआं उठा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के समय अचानक फैक्ट्री से धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ ही मिनटों में तेज धमाकों के साथ आग ने विकराल रूप ले लिया। दूरे से ही आग की ऊंची-ऊंची लपटें दिखाई दे रही थीं और काले धुएं का गुबार पूरे इलाके में फैल गया। हादसे के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
इस घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग बुझाने के दौरान बचाव दल को फैक्ट्री के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान कई लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना स्थल पर पहुंचे मेयर और नगर निगम के अधिकारी
हादसे की गंभीरता को देखते हुए अहमदाबाद के मेयर और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव कार्य का जायजा लिया। प्रशासन ने पूरे इलाके को सुरक्षा के लिहाज से घेर लिया ताकि किसी अन्य दुर्घटना की संभावना को रोका जा सके।

पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही रद्द
इस घटना की जांच में एक चौंकाने वाली जानकारी मिली है कि जिस फैक्ट्री में आग लगी, उसका संचालन मेहुल डोडिया नाम के व्यक्ति के नाम पर किया जा रहा था। यह फैक्ट्री झुग्गी-झोपड़ी जैसी संरचना में संचालित हो रही थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस (Firecracker Factory License) पहले ही रद्द किया जा चुका था, लेकिन इसके बावजूद यहां अवैध रूप से पटाखा निर्माण का काम जारी था।
ज्वॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस जयपाल सिंह ने बताया है कि फैक्ट्री के लाइसेंस को पहले ही निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए यहां उत्पादन जारी रखा गया। अब प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि लाइसेंस रद्द होने के बाद फैक्ट्री आखिर किसकी अनुमति से चल रही थी और संबंधित विभागों की निगरानी में कहां चूक हुई।
सुरक्षा नियमों की अनदेखी
वहीं, पटाखा निर्माण जैसी गतिविधियों में सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। अगर ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण (Storage of Flammable Substances), अग्निशमन उपकरणों और सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाए तो छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे मामलों में नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई आवश्यक मानी जाती है।
फिलहाल, आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए फोरेंसिक टीम (Forensic Team) और पुलिस की संयुक्त जांच जारी है। अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। साथ ही यह भी जांच होगी कि हादसे के समय फैक्ट्री में कितने कर्मचारी मौजूद थे और क्या वहां पर्याप्त आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था (Emergency Protection System) उपलब्ध थी।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर अवैध रूप से संचालित खतरनाक फैक्ट्रियों और सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर समय रहते नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई होती, तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर है।
ये भी पढ़ें: भारत का पहला निजी रॉकेट ‘विक्रम-1’ लॉन्च, अंतरिक्ष में पहुंचा PM मोदी का ‘वंदे मातरम्’ संदेश






