Railway Compensation Consumer: अगर आप अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं और आपको भी अपने समान की चोरी होने का खतरा बना रहता है कि अगर यह चोरी हो गया, तो मुझे कुछ नहीं मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। आज हम आपको भारतीय रेल में चोरी हुए समान को लेकर मिले अच्छे खासे रिफंड के मामले के बारे में बताएंगे। दरअसल, ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों के सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी भारतीय रेलवे की होती है। इसपर कोर्ट ने भी अपना फैसला सुनाया है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राजधानी एक्सप्रेस में एक महिला यात्री ने हैंडबैग चोरी होने के करीब पांच साल पुराने मामले जीत लिया है, जिसमें रेलवे ने उन्हें समाने के साथ-साथ अतिरिक्त भुगतान भी दिया है।
मुआवजा और मानसिक उत्पीड़न में मुआवजे की रकम मिली
पठानकोट स्थित उपभोक्ता आयोग ने राजधानी एक्सप्रेस (Rajdhani Express) में महिला का हैंडबैग चोरी होने के करीब पांच साल पुराने मामले में रेलवे को सेवा में कमी का दोषी माना गया है। ऐसे में आयोग ने उत्तरी रेलवे को महिला को मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस मामले में रेलवे को कुल 70 हजार रुपये मुआवजा और मानसिक उत्पीड़न के लिए 10 हजार रुपये अलग से देने होंगे। इसके अलावा मुआवजे की रकम पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देने का आदेश दिया है।
राजधानी एक्सप्रेस में गायब हुआ महिला का बैग
बताया जा रहा है कि यह मामला 14 दिसंबर 2021 के दिन का है, जब एक महिला अपने पति और बच्चे के साथ राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 12423 (Rajdhani Express Train No. 12423) से सफर कर रही थीं। परिवार ने ट्रेन के 3AC कोच में रिजर्वेशन कराया था। यात्रा के दौरान जब ट्रेन पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन (Pandit Deen Dayal Upadhyaya Railway Station) पर रुकी, तब महिला को पता चला कि उनका हैंडबैग गायब है।
महिला के अनुसार, बैग में करीब 5,000 रुपये नकद, लगभग 15 ग्राम वजन का मंगलसूत्र और भारतीय स्टेट बैंक यानी SBI की पासबुक मौजूद थी। सामान गायब होने का पता चलते ही परिवार ने उसे तलाशना शुरू किया। महिला के पति ने कोच अटेंडेंट (Coach Attendant) को खोजने की कोशिश की, लेकिन वह मौके पर मौजूद नहीं था।
इसके बाद उन्होंने ट्रेन में मौजूद रेलवे सुरक्षा बल (Railway Protection Force) यानी RPF एस्कॉर्ट और टीटीई को घटना की जानकारी दी। इस मामले को लेकर 16 दिसंबर 2021 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई। बाद में इस एफआईआर को जीआरपी कानपुर सेंट्रल भेजा गया।

शिकायत के बाद भी बरामद नहीं हुआ सामान
एफआईआर दर्ज होने के बाद महिला के परिवार ने चोरी हुए सामान को बरामद कराने के लिए कई बार अनुरोध किया। हालांकि, काफी प्रयासों के बावजूद उनका सामान वापस नहीं मिल सका। इसके बाद महिला के पति ने रेलवे पर यात्रियों की सुरक्षा और सेवा में लापरवाही का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। इस तरह से यह मामला करीब 5 साल तक कानूनी प्रक्रिया में चलता रहा। सुनवाई के दौरान रेलवे ने अपनी ओर से अलग-अलग तरह के तर्क पेश किए।
रेलवे का कहना था कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर को चोरी की सूचना नहीं दी गई थी। रेलवे ने यह भी तर्क दिया कि बिना बुक किए गए सामान के चोरी या गुम होने के लिए रेलवे को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।
रेलवे के अपने रिकॉर्ड से खुली पोल
जब मामला सामने खुलकर आने लगा तो उपभोक्ता आयोग के सामने रेलवे का यह तर्क ज्यादा देर नहीं टिक सका। ऐसे में आयोग ने मामले में मौजूद रिकॉर्ड और साक्ष्यों की सही तरह से जांच की, जिससे यह सामने आया कि यात्रा के दौरान चोरी की घटना की जानकारी आरपीएफ एस्कॉर्ट को दी गई थी।
यानी रेलवे का यह दावा कि घटना की जानकारी उसके कर्मचारियों को नहीं दी गई थी, उसके अपने रिकॉर्ड से ही गलत साबित हो गया। आयोग ने माना कि महिला के परिवार ने घटना के तुरंत बाद रेलवे अधिकारियों को इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद अपने गंतव्य पर पहुंचकर जीरो एफआईआर (Zero FIR) भी दर्ज कराई गई थी। मामले में चोरी हुए सामान से जुड़े साक्ष्य भी आयोग के सामने पेश किए गए। इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने रेलवे की ओर से सेवा में कमी मानी और उसे यात्री को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया।
रेलवे को देना होगा 70 हजार रुपये का मुआवजा
इस पूरे मामले की सही से जांच होने के बाद उपभोक्ता आयोग ने उत्तरी रेलवे (Northern Railway) को शिकायतकर्ता को 70 हजार रुपये मुआवजा देने का सख्त आदेश दिया है। इसके साथ ही मानसिक उत्पीड़न और परेशानी के लिए 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने को कहा गया है। इस तरह से अब महिला के परिवार को कुल 80 हजार रुपये रेलवे की तरफ से मिलेंगे। आयोग ने मुआवजे की रकम पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान किए जाने तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी आदेश दिया है। इतना ही नहीं, अगर रेलवे आदेश जारी होने के एक महीने के भीतर मुआवजे का भुगतान नहीं करता है, तो पूरी रकम पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।
ये भी पढ़ें: नींद के अलावा इन 7 कारणों से भी होते हैं डार्क सर्कल्स, जानें वजह और उपाएं






