Dark Circles Reasons in Hindi: आंखों के नीचे पड़ने वाले डार्क सर्कल्स (Dark Circles) को आप सब लोगों ने कई लोगों की आंखों के नीचे देखे होंगे, जिसे लोग नींद की कमी का मुख्य कारण मानते हैं, जो सही नहीं है। क्योंकि इसकी वजह कुछ ओर फिर होती है। देखा गया है कि कई लोग रोजाना 7 से 8 घंटे की भरपूर नींद लेते हैं, लेकिन फिर भी उनकी आंखों के नीचे काले घेरे बने रहते हैं। ऐसे में आपको यह समझना जरूरी है कि यह डार्क सर्कल्स सिर्फ कम सोने से नहीं होते हैं, बल्कि कई दूसरी वजहें इसका कारण है।
बता दें कि आंखों के नीचे की त्वचा शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में काफी पतली और नाजुक होती है। यही कारण है कि शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव भी सबसे पहले इसी हिस्से पर दिखाई देते हैं। वहीं, अगर आंखों के नीचे अगर लंबे समय से डार्क सर्कल्स बने हुए हैं या समय के साथ और गहरे होते जा रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए। ऐसे में आइए आज के इस आर्टिकल में हम जानते हैं कि इसके 7 मुख्य कारण क्या है ?
तनाव भी बढ़ाते हैं डार्क सर्कल्स
अगर आप हर समय तनाव में रहते हैं, तो यह सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि त्वचा पर भी असर दिखाती है। क्योंकि एक रिपोर्ट में पाया गया है कि तनाव बढ़ने पर शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन (Cortisol Hormone) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे नींद, रक्त संचार और त्वचा काफी हद तक प्रभावित होती है। तनाव की वजह से लोग अक्सर कम पानी पीते हैं, सही खानपान न होना और पर्याप्त आराम भी नहीं मिल पाना। इन सभी कारणों का असर आंखों के नीचे काले घेरों के रूप में दिखाई देता है।
उपाएं
इसके लिए आपको नियमित योग, मेडिटेशन और हल्की एक्सरसाइज तनाव कम करने में मदद कर सकते हैं।
शरीर में पानी की कमी
अगर आपके शरीर में पर्याप्त मात्रा पानी की कमी है, तो इसका असर चेहरे और त्वचा पर साफ तौर पर दिखाई देता है। इस स्थिति में डिहाइड्रेशन कम होता है और त्वचा बेजान व रूखी लगने लगती है। इससे आंखों के आसपास की रक्त वाहिकाएं अधिक उभरकर दिखाई देती हैं, जिससे डार्क सर्कल्स और गहरे नजर आते हैं।
उपाएं
इसके लिए आपको दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। साथ ही तरबूज, खीरा, संतरा और अन्य पानी से भरपूर फलों का भी सेवन करना चाहिए।
आयरन और पोषक तत्वों की कमी
शरीर को हर दिन ताकत देने और लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए आयरन, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की जरूरत होती है। अगर शरीर में आयरन की कमी हो जाए तो एनीमिया की समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में शरीर के सभी हिस्सों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है, जिससे आंखों के नीचे की त्वचा अधिक गहरी दिखाई देने लगती है।
बढ़ती उम्र का असर
इंसान की उम्र बढ़ना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसका असर हमारी त्वचा पर साफ तौर पर दिखाई देता है। देखा जाए तो समय के साथ शरीर में कोलेजन और इलास्टिन का स्तर कम होने लगता है। इससे आंखों के नीचे की त्वचा पहले से ज्यादा पतली हो जाती है। त्वचा पतली होने पर नीचे मौजूद रक्त वाहिकाएं साफ दिखाई देने लगती हैं, जिससे डार्क सर्कल्स अधिक गहरे नजर आते हैं। हर व्यक्ति में यह बदलाव विभिन्न तरह से होता है, क्योंकि इसमें स्किन टाइप और लाइफस्टाइल भी अपनी अहम भूमिका निभाता है।
एलर्जी और आंखों को बार-बार रगड़ना
धूल, मिट्टी, परागकण, मौसम में बदलाव या पालतू जानवरों के बाल जैसी चीजों से कई लोगों को एलर्जी हो जाती है, जिसका असर सबसे पहले लोगों को उनकी आंखों पर होता है। एलर्जी के कारण आंखों में खुजली होती है और लोग बार-बार आंखें रगड़ने लगते हैं। ऐसा करने से आंख के नीचे की त्वचा पर सूजन और जलन होती है, जिससे डार्क सर्कल्स बढ़ जाते हैं। इसके बचाव के लिए आपको अपने डॉक्टर से जरूरी संपर्क करना चाहिए।

ज्यादा स्क्रीन टाइम
आज के समय में लोगों का ज्यादातर समय मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर इस्तेमाल में जा रहा है। जिससे आंखें कमजोर होने लगती है और साथ ही लगातार कई घंटों तक स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव पड़ता है। इससे आंखों के आसपास की रक्त वाहिकाएं ज्यादा स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं और आंखों के नीचे कालापन बढ़ जाता है।
उपाएं
इस समस्या से बचने के लिए स्क्रीन की ब्राइटनेस संतुलित रखें और हर 20 से 25 मिनट बाद कुछ देर के लिए आंखों को आराम दें।
जेनेटिक्स और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं
वहीं, कुछ लोगों में डार्क सर्कल्स की वजह उनकी जीवनशैली नहीं, बल्कि माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों की देन भी होती है, जिसे आम भाषा में पारिवारिक बीमारी भी कहां जा सकता है। अगर ऐसे में भी डार्क सर्कल्स अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाएं और उनके साथ वजन कम होना, अत्यधिक थकान या चक्कर आने जैसी समस्याएं भी हों, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।
डार्क सर्कल्स से बचने के आसान उपाय
- डार्क सर्कल्स से बचने के लिए रोजाना पर्याप्त नींद लें।
- शरीर को हाइड्रेट रखें।
- संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
- स्क्रीन टाइम कम करें ।
- तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश करें।
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