Ganesh Chaturthi 2026: गणेश महोत्सव 14 सितंबर से होगा शुरू, इन दिनों में राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए करें ये उपाय

गणेश चतुर्थी हिंदु धर्म में बहुत ही पवित्र

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश महोत्सव इस साल 14 सितंबर 2026 से शुरू होने जा रहा है। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का बहुत ही विशेष महत्व होता है। दरअसल, भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, वाणी और शुभ कार्यों के देवता के रूप में पूजा जाता है। ज्योतिष के अनुसार, गणपति की आराधना करने से बुध ग्रह को मजबूत करने और राहु के नकारात्मक प्रभाव से भक्तों के मुक्ति मिलती है।

वहीं, अगर किसी व्यक्ति को पढ़ाई, याददाश्त, निर्णय लेने या अपनी बात सही तरीके से रखने में परेशानी होती है तो गणेश जी की पूजा (Ganesh ji ki Pooja) को लाभकारी माना जाता है। खासकर विद्यार्थियों को नियमित रूप से भगवान गणेश का स्मरण और पूजन करने की सलाह दी जाती है।

बुध ग्रह से भगवान गणेश का क्या संबंध है?

ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क, शिक्षा, संवाद और व्यापार का कारक माना जाता है। वहीं राहु को भ्रम, असमंजस, छल और गलत निर्णयों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में बुध को मजबूत रखने और राहु के प्रतिकूल प्रभाव से बचने के लिए भगवान गणेश की उपासना (Worship of Lord Ganesha) को विशेष महत्व दिया जाता है।

मान्यता है कि भगवान गणेश (Lord Ganesha) व्यक्ति को विवेक और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करते हैं। उनकी पूजा मन को शांत और एकाग्र करने में भी सहायक मानी जाती है। यही वजह है कि शिक्षा और संचार से जुड़े कार्यों में गणपति पूजा को शुभ माना जाता है।

इन लोगों के लिए गणेश पूजा मानी जाती है खास

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, अगर आपकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है और साथ ही अस्त या पीड़ित स्थिति में है, तो ऐसे व्यक्ति को गणपति बाबा की पूजा (Ganpati Baba ki Pooja) करनी चाहिए।

गणपति बाबा की पूजा विशेष रूप से वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न वाले जातकों को करनी चाहिए, इनके लिए बुध की स्थिति को बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा अगर बुध चौथे, छठे, आठवें, नौवें या बारहवें भाव में स्थित हो और वायु तत्व की राशियों यानी मिथुन, तुला या कुंभ से संबंध रखता हो, तो गणेश आराधना (Worship of Lord Ganesha) को शुभ माना गया है।

ऐसी ज्योतिषीय स्थितियों में व्यक्ति को विचारों को व्यवस्थित करने, सही निर्णय लेने या अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने में परेशानी महसूस होने की मान्यता है। गणपति पूजा (Ganpati Puja) को इन समस्याओं से निपटने के लिए आध्यात्मिक उपाय के तौर पर देखा जाता है।

राहु के अशुभ प्रभाव में भी करें गणपति पूजा

ज्योतिष के अनुसार, राहु की दशा या अंतर्दशा के दौरान भी भगवान गणेश की पूजा (Bhagwan Ganesh ki Puja) करना लाभकारी माना जाता है। राहु जहां भ्रम और मायाजाल का प्रतीक माना जाता है, वहीं गणपति बुद्धि (Ganpati’s Wisdom) और विवेक के देवता हैं।

इसी कारण राहु के प्रभाव से परेशान लोगों को गणेश जी का स्मरण (Remembering Lord Ganesha) करने की सलाह दी जाती है। खासकर लेखन, शिक्षा, अध्यापन, कम्युनिकेशन, ऑनलाइन कारोबार और मीडिया जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए गणपति आराधना को शुभ माना जाता है।

गणेश पूजा में इन बातों का रखें ध्यान

गणपति पूजा (Ganpati Puja) के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है। पूजा शुरू करते समय पूजा स्थल पर हल्दी और कुमकुम की एक-एक बिंदी लगाई जा सकती है। धार्मिक मान्यता में इन्हें भगवान गणेश की पत्नियों (Lord Ganesha’s wives) रिद्धि और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें। मान्यता के अनुसार 7, 9 या 11 दूर्वा चढ़ाना शुभ होता है। प्रसाद में मोदक के अलावा गुड़ और चने का भोग भी लगाया जा सकता है। गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के दौरान श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा (Worship of Lord Ganesha) करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता आती है।

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