UPI Payment Charges को लेकर मोदी सरकार ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। दरअसल, भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि UPI के माध्यम से भुगतान करने वाले ग्राहकों से किसी भी तरह का अलग से चार्ज नहीं लिया जाएगा। खास तौर पर Merchant Discount Rate यानी MDR का बोझ सीधे ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार के द्वारा UPI को लेकर हाल में नए नियम जारी किए गए है, जिसके जरिए चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ₹2,000 से अधिक की राशि के लिए MDR लागू कर दिया गया है। लेकिन ध्यान रहे कि इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को UPI से भुगतान करने के लिए अलग से चार्ज देना होगा। सरकार के मुताबिक MDR पेमेंट इकोसिस्टम के अंदर लगाया जाने वाला शुल्क है और इसे ग्राहक से नहीं वसूला जाएगा।
ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा MDR
सरकार की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक, UPI के नए नियमों का मुख्य उद्देश्य देश में डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाएं रखना है। साथ ही आम लोगों और छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ को भी काफी हद तक कम करना है।
भारत सरकार ने यह भी साफ तौर पर कहा है कि देश के व्यापारी MDR का पैसा ग्राहक से अलग से नहीं मांग सकते हैं। यानी अगर कोई ग्राहक किसी दुकान, सर्विस प्रोवाइडर या दूसरे मर्चेंट को UPI के माध्यम से भुगतान करता है, तो उससे केवल UPI इस्तेमाल करने के नाम पर अतिरिक्त रकम नहीं ली जानी चाहिए।
₹2,000 तक UPI पेमेंट रहेगा फ्री
- नए नियमों में ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI पेमेंट को शून्य MDR के दायरे में रखा गया है।
- Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांजैक्शन पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे ट्रांसफर की राशि कितनी भी हो।
- करीब 96 फीसदी मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन नए MDR प्रावधान से प्रभावित नहीं होंगे।
इसका मतलब साफ है कि अगर आप दोस्तों या परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेजते हैं, तो ऐसे में UPI पहले की तरह ही मुफ्त रहेगा। इसी तरह ₹2,000 तक के सामान्य मर्चेंट भुगतान पर भी ग्राहक से कोई UPI शुल्क नहीं लिया जाएगा।
15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR
सरकार और NPCI की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर नया MDR ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से देशभर में प्रभावी होगा। यानी की ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant UPI भुगतान पर 0.4 फीसदी MDR लागू होगा। यह शुल्क पेमेंट इकोसिस्टम (Payment Ecosystem) के संबंधित हिस्सेदारों के बीच वितरित होगा।
सरकार का कहना है कि नए सिस्टम का मकसद UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करना है। वहीं उपभोक्ताओं के हितों को सुरक्षित रखने के लिए यह साफ किया गया है कि MDR का अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर नहीं डलेगा।
नियमों के उल्लंघन पर रहेगी नजर
UPI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मोदी सरकार (Modi Government) का जोर कई चीजों पर है, जिसमें सबसे अहम नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर है। पेमेंट एग्रीगेटर्स (Payment Aggregators), बैंक और अन्य संबंधित पक्षों के माध्यम यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है कि नए शुल्क ढांचे का गलत तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सके।
ऐसे में अगर किसी ग्राहक से UPI Payment के नाम पर अलग से अतिरिक्त राशि मांगी जाती है, तो उसे सामान्य UPI शुल्क समझकर स्वीकार करने के बजाय संबंधित बिल और भुगतान की जानकारी जरूर जांच करनी चाहिए।
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