Defence Proposals 2026: भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने और देश की रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने की दिशा में भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। दरअसल, आज सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को शुरुआती मंजूरी दी गई है। इन प्रस्तावों में आधुनिक ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम, ट्रैक्ड गन सिस्टम, हेलिकॉप्टर और निगरानी से जुड़े कई उपकरण शामिल हैं। इनकी मदद से सेना की मारक क्षमता, निगरानी व्यवस्था और दुर्गम इलाकों में काम करने की क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
बता दें कि देश के रक्षा क्षेत्र में तेजी से बदलती तकनीक और आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए इन प्रस्तावों को बेहद अहम माना जा रहा है। यहां जानें इससे जुड़ी हर एक डिटेल्स।
जानें 2.12 लाख करोड़ के प्रस्तावों में क्या-क्या शामिल?
आज रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में भारतीय सेनाओं की जरूरतों के अनुसार कई महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की खरीद के प्रस्तावों को शुरुआती प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इनमें भारतीय सेना के लिए हाई मोबिलिटी व्हीकल्स (HMV), सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम, गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम (GSRS) और लाइट मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर्स (LMRH) शामिल हैं।
इसके अलावा इसमें बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (VSHORADS), प्लेटफॉर्म आधारित काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS), लॉन्ग रेंज यूएएस ब्रिक, सर्विलांस यूएवी, इंटीग्रेटेड सर्विलांस एंड स्ट्राइक सिस्टम और लॉन्ग रेंज कामिकेज ड्रोन सिस्टम की खरीद के प्रस्ताव भी शामिल हैं। इन सभी उपकरणों का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना की ऑपरेशनल (Indian Army’s Operational) क्षमता को बढ़ाना, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर तेजी से जवाब देने की क्षमता को मजबूत करना है।
दुर्गम इलाकों में तेजी से काम करेगी सेना
हाई मोबिलिटी व्हीकल्स यानी HMV सेना के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं। इन वाहनों को कठिन और दुर्गम इलाकों में सैनिकों और जरूरी सैन्य सामान की आवाजाही को आसान बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। पहाड़ी क्षेत्रों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर मोबिलिटी से सेना को अपने अभियान चलाने में मदद मिलेगी।
वहीं, सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रैक्ड गन सिस्टम मैकेनाइज्ड सैन्य टुकड़ियों को बेहतर गतिशीलता के साथ मजबूत मारक क्षमता देने के लिए तैयार किया जाता है। इससे सैन्य टुकड़ियां अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी स्थिति के अनुसार तेजी से आगे बढ़ते हुए तोपखाने की सहायता प्राप्त कर सकती हैं। गन शॉट रिस्पॉन्स सिस्टम (GSRS) का उद्देश्य गोलीबारी से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है। इससे युद्धक्षेत्र में फायरिंग के स्रोत का पता लगाने और सैनिकों को समय पर जानकारी देने में मदद मिल सकती है।
एयर डिफेंस और एंटी-ड्रोन सिस्टम से बढ़ेगी सुरक्षा
आधुनिक युद्ध में ड्रोन (Drones) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ऐसे में छोटे हवाई खतरों से निपटने के लिए वायु रक्षा प्रणालियों को मजबूत करना जरूरी हो गया है। प्रस्तावों में शामिल VSHORADS यानी वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम कम दूरी पर आने वाले हवाई खतरों से निपटने के लिए बनाया गया है।
इसके साथ ही काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) भी जरूरी है। इस तरह की प्रणाली का इस्तेमाल दुश्मन के ड्रोन की पहचान करने, उनकी निगरानी करने और जरूरत के अनुसार उन्हें निष्क्रिय करने के लिए किया जा सकता है। इससे सैन्य ठिकानों, वाहनों और अन्य महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
आधुनिक ड्रोन से मजबूत होगी निगरानी
मिली जानकारी के मुताबिक, रक्षा प्रस्तावों में लॉन्ग रेंज ड्रोन, सर्विलांस यूएवी और इंटीग्रेटेड सर्विलांस एंड स्ट्राइक सिस्टम को भी शामिल किया गया है। इन प्रणालियों के जरिए दूर तक निगरानी रखने और महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी जुटाने की क्षमता बढ़ाने पर जोर है। लॉन्ग रेंज कामिकेज ड्रोन सिस्टम भी प्रस्तावित खरीद का हिस्सा है। इस तरह के ड्रोन लक्ष्य पर हमला करने के लिए बनाए जाते हैं। आधुनिक ड्रोन तकनीक से सेना को दूर मौजूद खतरों का आकलन करने और जरूरत के मुताबिक कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
सेना और वायुसेना को मिलेंगे आधुनिक हेलिकॉप्टर
लाइट मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर्स (LMRH) का इस्तेमाल भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इनका उपयोग टोह लेने, निगरानी रखने, कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों में किया जा सकता है। हेलिकॉप्टर कठिन इलाकों में सैनिकों की आवाजाही और आपातकालीन परिस्थितियों में राहत कार्यों के लिए भी उपयोगी होते हैं।
रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने पर दिया जोर
देखा जाए तो करीब 2.12 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्ताव भारतीय सेनाओं के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर निगरानी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को दर्शाते हैं। हालांकि, DAC की शुरुआती मंजूरी को अंतिम खरीद या उपकरणों की तत्काल तैनाती नहीं माना जाना चाहिए।
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