Bihar Government Hospital Cleaning: सरकारी अस्पतालों में 1 अगस्त से बदल जाएगी सफाई व्यवस्था, जीविका दीदियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

Bihar Government Hospital Cleaning: जीविका दीदियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

Bihar Government Hospital Cleaning: बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों की साफ-सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। बताया जा रहा है राज्य के सरकारी अस्पतालों में 1 अगस्त 2026 से चरणबद्ध तरीके से सफाई की जिम्मेदारी जीविका दीदियों को सौंपी जाएगी। दरअसल इस नई व्यवस्था की शुरुआत राजधानी पटना के पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) से होगी। ऐसे में सरकार का मानना है कि इससे अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी, मरीजों को बेहतर माहौल मिलेगा और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

जानकारी के लिए बता दें स्वास्थ्य विभाग की इस पहल को अस्पताल प्रबंधन और जीविका समूहों के सहयोग से लागू किया जाएगा। इसके लिए कई अस्पतालों और जीविका के बीच सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

PMCH में 300 से ज्यादा जीविका दीदियां करेंगी सफाई

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह के अनुसार अस्पताल में सफाई व्यवस्था के लिए जीविका समूह के साथ औपचारिक करार हो चुका है। जिसमें नई व्यवस्था के तहत 300 से ज्यादा जीविका दीदियां अस्पताल परिसर में सफाई, स्वच्छता और संबंधित सेवाओं की जिम्मेदारी निभाएंगी।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एक अगस्त से इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। कर्मचारियों के कार्य विभाजन, प्रशिक्षण और निगरानी की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि सफाई कार्य बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।

‘दीदी की रसोई’ को भी मिलेगा नया स्थान

बता दें यह केवल सफाई ही नहीं, बल्कि अस्पताल में चल रही ‘दीदी की रसोई’ को भी नई व्यवस्था के तहत मजबूत किया जा रहा है। पीएमसीएच प्रशासन के मुताबिक, वर्तमान में संचालित रसोई को अस्पताल के टावर-2 में स्थानांतरित किया जाएगा।

यहां मरीजों और उनके परिजनों के लिए स्वच्छ और पौष्टिक भोजन तैयार किया जाएगा। इसके अलावा अस्पताल के मेस का संचालन भी जीविका समूहों को सौंपा जाएगा। इससे भोजन की गुणवत्ता, समय पर उपलब्धता और संचालन व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है।

राज्य के अन्य अस्पतालों में भी लागू होगी योजना

स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि यह व्यवस्था केवल पीएमसीएच तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इसी मॉडल को लागू किया जाएगा। इसके साथ ही ‘दीदी की रसोई’ की सुविधा भी अन्य बड़े अस्पतालों में शुरू करने की योजना बनाई गई है। सरकार का उद्देश्य अस्पतालों में साफ-सफाई और भोजन जैसी आवश्यक सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है।

निजी एजेंसियों की जगह लेंगी जीविका दीदियां

अब तक कई सरकारी अस्पतालों में सफाई का काम निजी एजेंसियों के माध्यम से कराया जाता था। नई नीति के तहत धीरे-धीरे इन एजेंसियों की जगह जीविका समूहों की महिलाओं को जिम्मेदारी दी जाएगी।

सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर काम करने वाली महिलाएं अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करेंगी, जिससे अस्पतालों में स्वच्छता की गुणवत्ता बेहतर होगी। साथ ही स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी बढ़ेगी।

महिलाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर

इस योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। जीविका समूह पहले से ही बिहार में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ रहे हैं।

ऐसे में अब अस्पतालों की सफाई, रसोई और अन्य सेवाओं से जुड़ने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं को नियमित आय का अवसर मिलेगा। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

मरीजों को मिलेगा स्वच्छ और बेहतर वातावरण

सरकारी अस्पतालों में सबसे बड़ी चुनौती साफ-सफाई बनाए रखना होती है। कई बार मरीजों और उनके परिजनों ने गंदगी और अव्यवस्था को लेकर शिकायतें भी की हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अस्पताल प्रशासन को उम्मीद है कि—

  • वार्डों की नियमित सफाई होगी।
  • शौचालयों की स्वच्छता में सुधार आएगा।
  • संक्रमण फैलने का खतरा कम होगा।
  • मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर वातावरण मिलेगा।
  • अस्पताल परिसर अधिक साफ और व्यवस्थित दिखाई देगा।

सरकार की दोहरी रणनीति

इस पहल के जरिए बिहार सरकार दो बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहती है। पहला, सरकारी अस्पतालों की स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाना और दूसरा, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना। इस मॉडल का प्रभावी तरीके से संचालन किया गया तो यह राज्य के अन्य सरकारी संस्थानों में भी लागू किया जा सकता है।

अस्पताल प्रशासन करेगा नियमित निगरानी

नई व्यवस्था के सफल संचालन के लिए अस्पताल प्रशासन निगरानी व्यवस्था भी मजबूत करेगा। सफाई कार्य की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर प्रशिक्षण तथा सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएंगे।अधिकारियों का कहना है कि मरीजों की सुविधा और अस्पताल की स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

क्या होगा इस पहल का असर?

  • सरकारी अस्पतालों की सफाई व्यवस्था में सुधार।
  • मरीजों और तीमारदारों को बेहतर सुविधाएं।
  • संक्रमण नियंत्रण में मदद।
  • ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर।
  • स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मजबूती।
  • अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही बढ़ेगी।

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