Election Commission: चुनाव में लाउडस्पीकर और जुलूस निकालने पर हुई सख्ती, प्रचार के लिए अब पहले से ही लेनी होगी अनुमति

Election Commission

Election Commission: अप्रैल महीने से भारत के विभिन्न राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। दरअसल, भारत निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च 2026 को 5 राज्यों में विधानसभा चुनावों का भी ऐलान कर दिया है। चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही संबंधित राज्यों में मॉडल आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू कर दी गई है। इस विषय पर चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को नियमों का सख्ती के साथ पालन करना जरूरी है।

बता दें कि इस बार विधानसभा चुनाव 2026 पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में होने जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ अन्य राज्यों में उपचुनाव भी कराए जाएंगे। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और चुनाव अधिकारियों के लिए निर्देश भी जारी कर दिए है कि वे चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाएं।

पोस्टर-बैनर हटाने के आदेश

इन शहरों में आचार संहिता लागू होते ही सरकारी और सार्वजनिक स्थानों पर लगे राजनीतिक पोस्टर, बैनर और होर्डिंग हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। आयोग के निर्देश के अनुसार, अब कोई भी दल या उम्मीदवार सरकारी भवन, सरकारी वाहन या किसी भी सरकारी संसाधन का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं कर सकते हैं।

अगर आपको किसी निजी संपत्ति पर झंडा या पोस्टर लगाना है, तो उसके लिए मकान मालिक की लिखित अनुमति होना जरूरी है।  बिना किसी भी अनुमति के दीवार या इमारत पर राजनीतिक प्रचार सामग्री लगाना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

सरकारी विज्ञापनों पर भी रोक

आचार संहिता लागू होने के साथ ही सरकारी खर्च से चलने वाले विज्ञापनों पर भी अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसपर आयोग का कहना है कि इससे सत्ताधारी दल को अनुचित लाभ मिलने की संभावना खत्म हो जाएगी। इसके अलावा, अब से किसी भी व्यक्ति के घर के बाहर जाकर प्रदर्शन या धरना देना कानूनन गलत माना जाएगा। मंत्रियों को भी निर्देश दिया गया है कि वे सरकारी कामकाज और चुनाव प्रचार को अलग-अलग रखें।

रैली, जुलूस और लाउडस्पीकर के लिए अनुमति लेना जरूरी
रैली, जुलूस और लाउडस्पीकर के लिए अनुमति लेना जरूरी

शिकायत के लिए कॉल सेंटर और मोबाइल ऐप

अगर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होता है, तो आम नागरिक भी इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए आयोग ने 1950 हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध करवाए है। इसके अलावा C-Vigil ऐप के जरिए भी लोग मौके की फोटो या वीडियो भेजकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत मिलने के बाद चुनाव अधिकारी तुरंत कार्रवाई करेंगे।

निगरानी के लिए उड़न दस्ते तैनात

चुनाव के दौरान होने वाली गड़बड़ियों पर ध्यान रखने और रोकने के लिए आयोग ने बड़े स्तर पर निगरानी व्यवस्था की है। चुनावी राज्यों में 5173 से ज्यादा फ्लाइंग स्क्वाड और 5200 से अधिक स्टेटिक सर्विलांस टीमें तैनात की गई हैं। इन सभी टीमों का काम चुनाव प्रचार, खर्च और गतिविधियों पर नजर बनाएं रखना है। आयोग ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार किया जाए और किसी भी दबाव में न आए।

रैली और जुलूस के लिए पहले अनुमति जरूरी

मिली जानकारी के अनुसार, इस बार के चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल को रैली, सभा या जुलूस निकालने से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस से अनुमति लेनी जरूरी होगा। इसके अलावा, उन्हें प्रचार के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए भी पहले ही मंजूरी लेना अनिवार्य है।

बताया जा रहा है कि चुनाव  की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पार्टियों के लिए रैली के लिए मैदान, हेलिपैड या अन्य सार्वजनिक स्थानों की बुकिंग के लिए आयोग ने SUVIDHA Portal की व्यवस्था की है। इस पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है और पहले आओ–पहले पाओ के आधार पर अनुमति दी जाएगी।

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