Officers Performance Scorecard: भारत सरकार ने सरकारी कामकाज में बिना देरी के समय पर पूरा करने के लिए और साथ ही पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। दरअसल, अब सिर्फ कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि शीर्ष स्तर के अधिकारियों के कामकाज का भी बाकायदा मूल्यांकन सरकार के द्वारा किया जाएगा।
बता दें कि केंद्र सरकार ने यूनियन सेक्रेटरी स्तर के अधिकारियों के लिए एक नया स्कोरकार्ड सिस्टम (New Scorecard System) लागू कर दिया है, जिसके चलते कर्मचारियों के प्रदर्शन को तय मानकों पर परखा जाएगा।
नई व्यवस्था में हर काम का अंक तय
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक वरिष्ठ अधिकारियों का मूल्यांकन ज्यादातर सामान्य आकलन और गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार की नई व्यवस्था के चलते हर एक काम के लिए अंक तय किए गए हैं। यानी अब अधिकारी क्या काम कर रहे हैं, कितना समय ले रहे हैं और कितनी लापरवाही बरत रहे हैं, सब कुछ अंकों में दर्ज किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि यह स्कोरकार्ड सिस्टम कैबिनेट सचिवालय की ओर से शुरू कर दिया गया है, जिससे सरकारी फाइलों में देरी खत्म हो सके, योजनाओं को समय पर पूरा करना और आम लोगों व कारोबारियों को राहत देना। खबरों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कई बार सरकारी प्रक्रियाओं में हो रही देरी पर नाराजगी जता चुके हैं, उसी दिशा में यह कदम काफी हद तक मददगार साबित होगा।
100 अंकों पर होगा पूरा मूल्यांकन
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों को कुल 100 अंकों के पैमाने पर परखा जाएगा। इस स्कोरकार्ड में अच्छे काम के लिए अंक तो मिलेंगे ही, लापरवाही पर कटौती भी होगी। यानी पहली बार ऐसा होगा जब अफसरों के लिए भी नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान तय किया गया है।
इस संदर्भ में सरकार का कहना है कि इस सिस्टम से नागरिकों, बिजनेस और स्टार्टअप्स को फायदा होगा। इजाजत, लाइसेंस, ग्रांट और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं तेज होंगी और अनावश्यक देरी कम होगी।
कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन के अनुसार, सितंबर, अक्टूबर और नवंबर 2025 की अवधि के लिए पहला प्रशासनिक रिपोर्ट कार्ड जनवरी 2026 में सेक्रेटरी स्तर के अधिकारियों को भेजा जा चुका है।

किन मानकों पर मिलेंगे अंक
इस स्कोरकार्ड में अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग वेटेज तय हुए है, जिसमें सबसे ज्यादा 20 अंक फाइलों के निपटान के लिए रखे गए हैं। यानी फाइलें जितनी तेजी से निपटेंगी, उतने ज्यादा अंक मिलेंगे।
आउटपुट और गतिविधियों के लिए 15 अंक
- योजनाओं और कैपिटल प्रोजेक्ट्स पर खर्च के लिए 15 अंक
- जन शिकायतों के समाधान
- कैबिनेट नोट तैयार करने की गुणवत्ता
- बड़े प्रोजेक्ट्स की समय पर निगरानी और पूर्ति
- बिलों की समय पर मंजूरी जैसे मानक भी शामिल किए गए हैं।
लापरवाही पर भी कटेंगे अंक
भारत सरकार के इस सिस्टम की सबसे अच्छी खास यह है कि इसमें 12 अंकों की नेगेटिव मार्किंग (Negative Marking) भी शामिल की गई है। अगर कोई भी अधिकारी विदेशी दौरों या आयोजनों पर जरूरत से ज्यादा खर्च करता है, तो ऐसी स्थिति में फाइलें लंबे समय तक लंबित हो सकती है। इसके अलावा, MSME को भुगतान में देरी करता है, तो उसके अंक काटे जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि इसमें 5 अंक डिस्क्रेशनरी रखे गए हैं। यानी कोई अधिकारी या विभाग अगर असाधारण काम करता है या कोई विशेष योगदान देता है, तो कैबिनेट सचिव उसे ज्यादा अंक देंगे।
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