Brahmaputra Tunnel: भारत सरकार ने देश के विकास की प्रगति में एक ओर नया कदम बढ़ाया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने उत्तर-पूर्व भारत के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे अब देश की पहली रोड-कम-रेल सुरंग (India’s first road-cum-rail tunnel now runs under the Brahmaputra River) को बनाया जाएगा। इसके लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक कैबिनेट बैठक भी आयोजित की गई। जहां पर असम में ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) के नीचे देश की पहली रोड-कम-रेल अंडरवाटर सुरंग बनाने की मंजूरी दे दी गई।
बता दें भारत की ब्रह्मपुत्र नदी के यह सुरंग गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच सुरक्षित तरीके से बनाई जाएगी। ऐसे में आइए Today Toplcal News में इससे जुड़ी हर एक जानकारी को विस्तार से जानते हैं।
बिस्वनाथ और गोलाघाट से जुड़ेगी सुरंग
खबरों के मुताबिक, भारत की यह ऐतिहासिक परियोजना असम के बिस्वनाथ और गोलाघाट जिलों को एक साथ सीधे जोड़ने का काम करेगी। इस कार्य पर सरकार का कहना है कि यह कदम ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) को मजबूती देने में अपनी अहम भूमिका निभाएगा। देश में इस सुरंग के बनने के बाद से उत्तर-पूर्वी राज्यों के बीच कनेक्टिविटी पहले से ही अधिक बेहतर होगी और क्षेत्रीय विकास को नई रफ्तार भी मिलेगी।

देश की पहली ट्विन ट्यूब रोड-कम-रेल परियोजना
बताया जा रहा है कि यह सुरंग करीब 15.8 किलोमीटर लंबी है, जिससे यह अंडरवाटर सुरंग देश की पहली ट्विन ट्यूब रोड-कम-रेल परियोजना बन जाती है। इसमें दो समानांतर टनल बनाई जाएंगी। सुरंग में चार लेन की सड़क (Four-lane road in the Tunnel) के साथ रेल मार्ग की भी सुविधा को भी ध्यान में रखा गया है। इसके पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 34 किलोमीटर तक बताई जा रही है।
वही, इस परियोजना की अनुमानित लागत 18,662 करोड़ रुपये तय की गई है। यह भी कहा जा रहा है कि सरकार के द्वारा इस पूरे कार्य को पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके निर्माण कार्य के दौरान अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि सुरक्षा और गुणवत्ता के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।
6 घंटे की दूरी 20 मिनट में होगी पूरी
सरकार के अनुसार, इस सुरंग के बनने से गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच की दूरी 240 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 34 किलोमीटर तक ही रह जाएगी। इस समय जहां सफर को पूरा करने में लगभग 6 घंटे का समय लगता है, वहीं परियोजना का काम पूरा होने के बाद यह दूरी महज 20 मिनट में ही तय की जा सकेगी। इससे समय और ईंधन दोनों की ही बचत होगी।
परियोजना के लाभ (Benefits of the Project)
- असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच तेज और सुगम संपर्क स्थापित।
- सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच आसान होने से सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी।
- पर्यटन, व्यापार और उद्योग को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
- उत्तर-पूर्व क्षेत्र में निवेश के नए अवसर खुलेंगे।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
- स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा।
- क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां की रफ्तार बढ़ेंगी।






