Board of Peace: ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई मुस्लिम देश हुए शामिल, यूरोप ने बनाई अमेरिका से दूरी

ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई मुस्लिम देश हुए शामिल

Board of Peace: ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई मुस्लिम देशों की भागीदारी से वैश्विक राजनीति में एक बार फिर से हलचल शुरू हो गई है। यहां पढ़ें इसे पीछे की असल वजह क्या है?

Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। दरअसल, इस बोर्ड में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, तुर्की, जॉर्डन, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान जैसे 8 बड़े मुस्लिम देशों ने अपने आपको शामिल होने की सहमति जताई है। बताया जा रहा है कि इन देशों के विदेश मंत्रालयों ने संयुक्त बयान जारी किया है और उसमें उन्होंने कहा है कि वे इस पहल का समर्थन करेंगे।

बता दें कि इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य इजरायल-हमास संघर्ष (Israel–Hamas conflict) के बाद गाजा पट्टी में स्थिरता लाना और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को तेज करने की बात कहीं गई है।

बोर्ड के फैसले से खड़े हुए कई सवाल

बोर्ड के इस फैसले को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसपर लोगों के द्वारा प्रतिक्रियाएं भी दी जा रही है कि यह बोर्ड फिलिस्तीनी हितों की अनदेखी कर सकता है और जिसमें अमेरिकी व इजरायली का प्रभाव ज्यादा रहेगा। खबरों के मुताबिक, ट्रंप इस मंच को संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में आगे बढ़ाना का विचार कर रहे हैं, ताकि अमेरिका जैसे देश की भूमिका और मजबूत बन सके।

ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई मुस्लिम देश हुए शामिल
ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई मुस्लिम देश हुए शामिल

मुस्लिम देशों के द्वारा किया जा रहा विरोध

इस बोर्ड को लेकर मुस्लिम देशों (Muslim Countries) में भी विरोध किया जा रहा है। देखा जाए तो पाकिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस फैसले की आलोचना सख्ती के साथ की जा रही है, जिसपर कई लोगों का कहना है कि ऐसे समय में जब गाजा में फिलिस्तीनियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा, तो ऐसे में मुस्लिम देशों को मजबूत रुख अपनाना चाहिए था। इस तरह से अंतरराष्ट्रीय शांति (International Peace) मामलों के कामकाज पर बाधा आ सकती है। मुस्लिम देशों की भागीदारी से गाजा के भविष्य को लेकर नई संभावनाएं है, लेकिन इस पहल के लिए एक बड़ी चुनौती भी सामने खड़ी हो सकती है।

अमेरिका के बोर्ड से कई देशों ने बनाई दूरी

अमेरिका के इस बोर्ड से यूरोप के कई प्रमुख देशों ने दूरी बना ली हैं। फ्रांस और ब्रिटेन जैसे अमेरिका के करीबी सहयोगी भी इस फैसले में शामिल होने को तैयार नहीं हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के करीबी सूत्रों के अनुसार, ट्रंप का ग्रीनलैंड (Greenland) को लेकर आक्रामक रुख यूरोप में नाराजगी की एक बड़ी वजह बताई जा रही है। इसके अलावा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी ट्रंप की नीतियों की खुलकर आलोचना की।

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