GST 2.0: कारोबारियों को बड़ी राहत, अब टैक्स मामलों में सीधे नहीं होगी गिरफ्तारी, कोर्ट की मंजूरी अनिवार्य

GST Law Changes

GST Law Changes:  भारत में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी खबर है। दरअसल, केंद्र सरकार जल्द ही GST से जुड़े कुछ अहम नियमों में बदलाव करने जा रही है, जिसका असर देशभर के व्यापारियों समेत कई लोगों पर देखने को मिल सकता है। बताया जा रहा है कि सरकार GST 2.0 के तहत टैक्स कानूनों में कई अहम बदलाव करेगी, जिसमें सबसे बड़ा प्रस्ताव टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी नियम को सीमित करना और आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा सख्त करने के साथ-साथ बढ़ाना भी है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 7 अक्टूबर को होने वाली GST Council Meeting में इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो गंभीर टैक्स मामलों में भी अधिकारी अपनी तरफ से सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकेंगे। गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी होगी।

टैक्स अफसरों की गिरफ्तारी के होंगे नए नियम

फिलहाल देश में CGST Act की धारा 69 के तहत कुछ गंभीर मामलों में टैक्स कमिश्नर की मंजूरी से गिरफ्तारी का प्रावधान तय है। इनमें फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), टैक्स चोरी और गलत रिफंड जैसे मामलों को शामिल किया गया हैं। वही, नए प्रस्ताव में इस व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया जाएगा। इसके तहत टैक्स अधिकारी कमिश्नर (Tax Commissioner) की अनुमति मिलने के बाद भी सीधे किसी कारोबारी को गिरफ्तार करने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे में अब गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी की जरूरत होगी। सरकार का इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य कारोबारियों को अनावश्यक आपराधिक कार्रवाई से राहत देना और टैक्स सिस्टम को अधिक से अधिक पारदर्शिता बनान है।

केस की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़कर ₹5 करोड़ करने का प्रस्ताव

वहीं, GST 2.0 में दूसरा बड़ा बदलाव आपराधिक मुकदमे की सीमा पर भी किया जा सकता है। अभी 1 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स गड़बड़ी वाले मामलों में आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान है। अब इस सीमा को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव तय करने की खबर सामने आई है।

देखा जाए तो अगर यह बदलाव लागू कर दिया जाता है, तो 5 करोड़ रुपये से कम की टैक्स गड़बड़ी वाले मामलों में सीधे आपराधिक मुकदमा चलाने के बजाय टैक्स की वसूली, ब्याज और जुर्माने के जरिए मामला जल्द ही निपट जाएंगे और अधिकारियों का भी सबसे अधिक इन्हीं मामलो पर ध्यान होगा।

छोटे और तकनीकी विवादों में राहत की उम्मीद

Goods and Services Tax (GST)  में कारोबारियों को अक्सर ITC, टैक्स वैल्यूएशन, रिफंड और नियमों की अलग-अलग व्याख्या को लेकर विभाग के साथ विवाद का सामना करना पड़ता है। ऐसे कई मामलों में धोखाधड़ी की मंशा के बजाय तकनीकी गलती या नियमों को समझने में अंतर हो सकता है। सरकार का प्रस्ताव ऐसे मामलों को आपराधिक कार्रवाई से अलग रखने पर केंद्रित हो सकता है। यानी हर टैक्स विवाद (Tax Dispute) को जेल और आपराधिक मुकदमे तक ले जाने के बजाय आर्थिक जुर्माने और टैक्स रिकवरी (Tax Recovery) से निपटने की व्यवस्था मजबूत हो सकती है।https://www.gst.gov.in/docadvisor/

24 अपराधों की समीक्षा, 9 अपराध हटाने पर विचार

GST कानून में अपराधों से जुड़े प्रावधानों की भी समीक्षा सही तरह से की जा रही है। प्रस्ताव के तहत कुल 24 अपराधों की समीक्षा की जा सकती है। इनमें से 9 अपराधों को कानून से हटाने और कुछ मध्यम श्रेणी के अपराधों में सजा की अवधि को 3 साल से घटाकर 2 साल करने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा छोटे कारोबारियों के लिए लेट फीस में राहत, GST रजिस्ट्रेशन और इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया को आसान बनाने पर विस्तार से चर्चा होगी।

तकनीक के जरिए फर्जीवाड़े पर नजर

भारत सरकार का यह भी मानना है कि GST का डिजिटल सिस्टम पहले की तुलना में काफी मजबूत और आसान हो चुका है। देश में खरीद-बिक्री के डेटा का मिलान करके फर्जी बिल और संदिग्ध लेनदेन की पहचान पहले ही की जा सकती है। ऐसे में GST 2.0 के तहत अधिकारियों की सीधी कार्रवाई पर निर्भरता कम करके टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी को बढ़ावा मिलेगा। इससे कारोबारियों के लिए नियमों का पालन आसान होने और Ease of Doing Business को बढ़ावा मिलने की सबसे अधिक संभावना जताई जा रही है।

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