AI Impact Summit 2026: राजधानी में स्थिति भारत मंडपम में 16 फरवरी से आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक रोबोट डॉग से जुड़ी खबर वायरल हो रही है। दरअसल, भारत के इस AI इम्पैक्ट समिट 2026 (AI Impact Summit 2026) में से आयोजकों ने Galgotias University को एक्सपो एरिया से अपना स्टॉल हटाने के निर्देश दे दिए।
बता दें कि यह मामला उस समय तुल पकड़ा, जब यूनिवर्सिटी के पवेलियन में एक क्वाड्रुपेड रोबोट डॉग का प्रदर्शन किया गया। जहां पर इस AI रोबोट को ‘Orion’ का नाम दिया गया। वही, एक वायरल वीडियो में फैकल्टी सदस्य इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में विकसित प्रोजेक्ट के रूप में बताया गया था।
Unitree Robotics का क्या है विवाद?
इस वीडियो के सामने आने के बाद टेक्नोलॉजी से जुड़े कई विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया है कि यह रोबोट चीन की कंपनी Unitree Robotics का Go2 मॉडल है, जिसे बस LOGO लगाकर इस कार्यक्रम में पेश किया गया है। दरअसल, यह रॉबोट मॉडल बाजार में पहले से ही उपलब्ध है और इसकी कीमत लगभग 2 से 3 लाख रुपये तक है।
इस संदर्भ में कई लोगों ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी ने एक कमर्शियल प्रोडक्ट को इन-हाउस इनोवेशन की तरह पेश किया है। इसपर सख्त और जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए। इस मामले के बाद से ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई है। इसपर कुछ यूजर्स ने कहा कि यह ‘मिसरिप्रेजेंटेशन’ है, तो कुछ ने इसे भारत की खराब छवि से जुड़ा मामला बताया है।
सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद
यह मुद्दा अब राष्ट्रीय खबर बन गई, जिसपर टेक इंडस्ट्री के कई लोगों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर किसी उत्पाद की गलत प्रस्तुति से देश की छवि प्रभावित होती है। चीनी मीडिया और विदेशी यूजर्स ने भी इस मामले पर अपनी टिप्पणी की है। सोशल मीडिया के कई पोस्ट में यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि रोबोट खरीदा गया था, तो उसे स्पष्ट रूप से उसी रूप में पेश क्यों नहीं किया गया, क्या ऐसा करना सही था या फिर इससे कुछ और बनाना था।

यूनिवर्सिटी ने दी अपनी सफाई
विवाद अधिक बढ़ने के बाद Galgotias University ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी किया और कहा कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोट पूरी तरह से उनका खुद का विकसित किया हुआ प्रोडक्ट है।
उन्होंने कहा कि यह रोबोट छात्रों की ट्रेनिंग, रिसर्च और प्रैक्टिकल लर्निंग के लिए खरीदा गया है। इसे AI इकोसिस्टम के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया गया था। इसके अलावा कुछ प्रोफेसर्स ने यह भी कहा कि वीडियो को गलत तरीके से समझा गया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
सरकार और आयोजकों का कदम
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते विवाद और वायरल वीडियो को देखते हुए आयोजकों ने यूनिवर्सिटी को तुरंत एक्सपो एरिया खाली करने के दिशा-निर्देश दिए। हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह कदम समिट को बनाए रखने के लिए अहम है, इसलिए उसे कार्यक्रम से तुंरत हटाने के लिए कहा गया है।
देखा जाए तो भारत के इस AI इम्पैक्ट समिट 2026 (AI Impact Summit 2026) में देश-विदेश के कई बड़े टेक विशेषज्ञ, स्टार्टअप्स और संस्थान शामिल हो रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह की गलत जानकारी या विवाद से कार्यक्रम की छवि प्रभावित हो सकती है।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि समिट में चीनी उत्पादों को भारतीय बताकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने इसे “डिसऑर्गनाइज्ड PR स्पेक्टेकल” करार दिया और कहा कि इससे देश की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
क्यों अहम है यह मामला?
यह विवाद ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) और देश में हो रहे AI इनोवेशन के दावों पर भी सवाल खड़े करता है। फिलहाल सभी की नजर आयोजकों के आधिकारिक बयान और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। AI और टेक्नोलॉजी से जुड़े बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में पारदर्शिता और स्पष्ट जानकारी होना सबसे अधिक जरूरी है। इस तरह के किसी भी प्रोडक्ट की उत्पत्ति, निर्माण और उपयोग के बारे में सही जानकारी देना विश्वसनीयता तौर पर सबसे महत्वपूर्ण है।
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