Dharmendra Pradhan Resigns: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छोड़ा पद, कहा- ‘जिम्मेदारी से कभी मुंह नहीं मोड़ा’

धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया

Dharmendra Pradhan Resigns: पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में चल रहे नीट पेपर मामले पर CJP के द्वारा लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। वह आज पूरी हो गई है। दरअसल, आज शनिवार, 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन चल रहा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत सरकार और CJP के बीच तीसरे दौर की बातचीत से पहले ही धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने पद छोड़ने का फैसला लिया।

इस्तीफे की कॉपी सोशल मीडिया पर साझा

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इस्तीफे की कॉपी साझा की है, जिमसें लिखा है कि मैंने हमेशा अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश की है। मेरा यह फैसला किसी व्यक्तिगत कारण से नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की गरिमा को ध्यान में रखते हुए लिया है।

इस्तीफे में क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?

अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan Resigns) ने लिखा है कि उन्होंने कभी भी अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा है। पिछले चार दशक से अधिक समय से वह शिक्षा, छात्रों और शिक्षकों के हित में काम करते रहे हैं। उनका मानना है कि किसी भी देश के विकास की सबसे मजबूत नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है।

उन्होंने कहा कि 3 मई को NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत मिलते ही केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई की थी। मामले की जांच CBI को सौंपी गई और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। उन्होंने यह भी बताया कि विवाद के बाद दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई ताकि छात्रों के साथ न्याय हो सके।

2027 से CBT मोड में होगी NEET परीक्षा

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि भारत सरकार ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि 2027 से NEET परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की जाएगी। उनका कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने की कोशिश की। पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से वह बेहद दुखी हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल उनके सम्मान का मामला नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का प्रश्न है। इसी वजह से उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।

छात्रों के भविष्य का दिया हवाला

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि वह नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य राजनीतिक विवादों (Political Disputes) और कानूनी लड़ाइयों में उलझे। बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर जनता का विश्वास बनाए रखना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद छोड़ने का फैसला लिया है।

CJP लगातार कर रही थी इस्तीफे की मांग

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रही थी। पार्टी प्रमुख अभिजीत दिपके (Party Chief Abhijit Dipke) 28 जून से अपने समर्थकों के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहे थे। इसी धरने में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) भी भूख हड़ताल पर बैठे थे। उन्होंने दो दिन पहले अपना अनशन समाप्त कर दिया, लेकिन CJP का प्रदर्शन जारी रहा। पार्टी ने साफ कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।

सरकार और CJP के बीच हुई बातचीत

बीते कुछ दिनों से केंद्र सरकार और CJP के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत हुई थी। दोनों पक्षों के बीच दो प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई थी। वहीं, मोदी सरकार (Modi Government) ने इस विषय पर विचार करने के लिए 24 घंटे का समय मांगा था। तय समय सीमा पूरी होने से पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया। इसके बाद अब सरकार और CJP के बीच होने वाली अगली बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल

NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद देश की परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था (Education System) को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष के साथ-साथ कई छात्र संगठन भी परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। ऐसे माहौल में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

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