Haryana Electricity Strike Ends: हरियाणा बिजली कर्मचारी हड़ताल खत्म करने का आज फैसला लिया है। दरअसल, हरियाणा में करीब 40 हजार बिजली कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज के साथ बैठक के बाद हड़ताल वापस ले ली है। सरकार की ओर से कर्मचारियों की मांगों पर आश्वासन दिए जाने के बाद बिजली आपूर्ति जल्द सामान्य होने की उम्मीद है। कर्मचारियों ने निजीकरण नहीं करने और बिजली वितरण के समानांतर लाइसेंस रद्द करने की मांग उठाई है। लंबित मुद्दों पर चर्चा के लिए 3 नवंबर को अगली बैठक होगी।
बता दें कि हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने से प्रदेश के लोगों को बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज के साथ हुई बैठक के बाद कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया। कर्मचारियों के काम पर लौटने से बिजली आपूर्ति व्यवस्था को जल्द सामान्य करने में मदद मिलेगी। जानकारी के मुताबिक, सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुई बातचीत में बिजली क्षेत्र के निजीकरण, निजी कंपनियों को परियोजनाएं सौंपने और बिजली वितरण के समानांतर लाइसेंस जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से कर्मचारियों को उनकी मांगों पर आश्वासन दिया गया। इसके बाद संयुक्त कार्रवाई समिति ने हड़ताल समाप्त करने और कर्मचारियों के तत्काल काम पर लौटने की घोषणा की।
40 हजार बिजली कर्मचारियों के काम पर लौटने से मिलेगी राहत
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल (Strike by Electricity Employees) के कारण बिजली व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में हड़ताल खत्म होने की घोषणा से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। बिजली आपूर्ति से जुड़े कर्मचारी अब अपना काम दोबारा शुरू करेंगे, जिससे व्यवस्था को सामान्य करने में मदद मिलेगी।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और बिजली मंत्री अनिल विज के साथ बातचीत के बाद बिजली कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया। संयुक्त कार्रवाई समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली आपूर्ति तत्काल बहाल करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह सामान्य होने में स्थानीय परिस्थितियों और मरम्मत संबंधी जरूरतों के अनुसार समय लग सकता है।
निजीकरण नहीं करने का मिला आश्वासन
बिजली कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में राज्य के बिजली क्षेत्र का निजीकरण नहीं करना शामिल है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ाने से जुड़ी योजनाओं को लेकर उनकी आपत्ति है।
बैठक के बाद संयुक्त कार्रवाई समिति ने कहा कि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि राज्य के बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों को प्रवेश देने की दिशा में कदम नहीं उठाए जाएंगे। इसके साथ ही बिजली वितरण के लिए जारी समानांतर लाइसेंस रद्द करने के मुद्दे पर भी कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बिजली व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में कर्मचारियों के हितों और सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका को ध्यान में रखा जाना चाहिए। सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद कर्मचारियों ने फिलहाल हड़ताल समाप्त करने का फैसला किया है।
HERC को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Chief Minister Nayab Singh Saini) ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार बिजली कर्मचारी संघ के साथ खड़ी है और अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (Haryana Electricity Regulatory Commission) एक स्वतंत्र संस्था है, जो अपने अधिनियम के तहत काम करता है। आयोग समय-समय पर सुझाव देता है, मार्गदर्शन करता है और जरूरी निर्देश जारी करता है। सरकार को भी कई मामलों में आयोग के आदेशों और निर्देशों को लागू करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आयोग की स्वतंत्र भूमिका को ध्यान में रखते हुए सरकार को संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करनी होती है।
धारा 108 के तहत सरकार ने लिया फैसला
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आगे बताया कि सरकार ने इस मामले में धारा 108 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए हरियाणा विद्युत नियामक आयोग को समीक्षा करने और संबंधित प्रावधान को प्रभावी ढंग से रद्द करने के निर्देश दिए हैं।
इस फैसले को कर्मचारी संगठनों की मांगों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, संबंधित प्रावधानों पर आगे की कार्रवाई और उनके प्रभाव को लेकर स्थिति आयोग की समीक्षा तथा आधिकारिक निर्णयों के बाद स्पष्ट होगी। मुख्यमंत्री के साथ हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्मचारी संघ के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। बातचीत के बाद कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मिले आश्वासन के आधार पर हड़ताल वापस लेने की घोषणा की।
3 नवंबर को फिर होगी बैठक
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने के बावजूद सभी मुद्दों का समाधान होना अभी बाकी है। लंबित मांगों और अन्य संबंधित विषयों पर चर्चा करने के लिए सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच अगली बैठक 3 नवंबर को निर्धारित की गई है। इस बैठक में कर्मचारियों की बाकी मांगों पर आगे की चर्चा होने की उम्मीद है। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका रुख बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ है और वे इस मुद्दे पर अपना पक्ष सरकार के सामने रखते रहेंगे।
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