Iran US Conflict: बीते कुछ दिनों से ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के साथ-साथ उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए हैं।
बता दें कि फिलहाल के लिए अभी तक इन सभी दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इन खबरों ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। अगर यह सच साबित होता है तो मध्य पूर्व की राजनीति में अब तक का यह सबसे बड़ा घटनाक्रम होगा।
सालों से चल रही थी योजना? (Was the plan ongoing for years?)
लंदन स्थित प्रतिष्ठित अखबार Financial Times की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि यह ऑपरेशन अचानक नहीं बल्कि कई सालों की रणनीतिक तैयारी का नतीजा था। क्योंकि इजरायली खुफिया एजेंसियों ने तेहरान में डिजिटल निगरानी का अपना एक अलग से ही जाल बिछा रखा था।
बताया जा रहा है कि ट्रैफिक कैमरों को पहले से ही हैक कर लिया गया था, जिससे खुफिया एजेंसियां के द्वारा लगातार संवेदनशील इलाकों की गतिविधियों पर नजर बनी हुई थीं। इसके अलावा मोबाइल नेटवर्क में कथित सेंध के जरिए शीर्ष नेताओं की लोकेशन ट्रैक की जाती थी। इसी तकनीकी निगरानी के आधार पर इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। हालांकि अभी तक इन सभी दावों की सही से पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन डिजिटल जासूसी के इस कथित तरीके ने सुरक्षा विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है।

नेतन्याहू और वेंस का बयान
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि ईरान का शासन सालों से इजरायल और अमेरिका के खिलाफ साजिशों में अपनी अहम मौजूदगी दर्ज करवाता रहा है। ऐसे में उन्होंने इस कार्रवाई को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है।
वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस युद्ध पर कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो ईरान का परमाणु गंभीर खतरा बन सकता था। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि यह कदम भविष्य में संभावित बड़े संघर्ष को रोकने के लिए लिया गया है।
मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम पर निशाना
अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रम तेजी से विकसित हो रहे थे। उनके अनुसार, यह ऑपरेशन केवल किसी एक नेता के खिलाफ नहीं बल्कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से किया गया।
वैश्विक पर इसका प्रभाव और बढ़ता तनाव की स्थिति
इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता तेजी से बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है। तेल बाजार, शेयर बाजार और कूटनीतिक हलकों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। इस दौरान दुनिया के सभी देशों की निगाहें तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी हैं। आधिकारिक पुष्टि और आगे की रणनीति सामने आने के बाद ही स्थिति साफ होगी।
ये भी पढ़ें: ‘मोदी जी, हमें बचाइए’… हवाई हमलों और सुरक्षा खतरों के बीच विदेश में फंसे भारतीयों ने मदद की लगाई गुहार






