Kanwar Yatra 2026: जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि सावन का पवित्र माह चल रहा है और कई श्रद्धालु इन दिनों कांवड़ यात्रा पर जाते हैं। ऐसे में कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन की ओर से बेहतर यातायात व्यवस्था की जाती है। इसी क्रम में सोमवार को यूपी जिले गाजियाबाद के शालीमार गार्डन में कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) के चलते जाम की स्थिति ने प्रशासन की तैयारियों पर कई तरह के सवाल खड़े हो गए है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिकंदरपुर चौकी से लेकर पसोंडा तक सड़क की खराब हालत, जगह-जगह बने गड्ढों और यातायात नियंत्रण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कांवड़ यात्रा समेत आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। करीब 5 मिनट का सफर तय करने में लोगों को लगभग 2 घंटे तक का समय लग रहा है।
दिनभर वाहनों की लंबी कतारें लगी
स्थानीय लोगों के अनुसार, सोमवार को शालीमार गार्डन क्षेत्र में दिनभर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण वाहन धीमी गति से चलते रहे। इसके बाद वाहनों की संख्या बढ़ने से जाम की स्थिति और गंभीर हो गई। कई राहगीरों और वाहन चालकों को काफी देर तक जाम में फंसे रहना पड़ा।
19 जुलाई की बैठक में किए गए थे कई दावे
जानकारी के मुताबिक, 19 जुलाई को शालीमार गार्डन थाने में अतुल कुमार सिंह की ओर से कांवड़ यात्रा की तैयारियों को लेकर बैठक बुलाई गई थी। बैठक में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही के साथ आम लोगों के यातायात को भी सुचारु रखने का आश्वासन दिया गया था। साथ ही जाम की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल (Police Force) की तैनाती की बात भी कही गई थी।
वहीं, देखा जाए तो आज यानी सोमवार को मौके पर दिखाई दी स्थिति इन तैयारियों से एक दम अलग नजर आई। सिकंदरपुर चौकी से पसोंडा तक कई जगह सड़क टूटी हुई थी। सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण वाहनों की रफ्तार कम रही और धीरे-धीरे लंबा जाम लग गया।
यातायात पुलिस की कम मौजूदगी से बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि जाम वाले स्थानों पर पर्याप्त संख्या में यातायात पुलिसकर्मी (Traffic Policeman) मौजूद नहीं थे। ऐसे में वाहनों को नियंत्रित करने और जाम खुलवाने में काफी समय लगा। सड़क की खराब स्थिति के साथ यातायात प्रबंधन की कमी ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी।
कांवड़ सेवा शिविरों (Kanwar Service Camps) में तैनात वॉलंटियरों से भी यातायात व्यवस्था में सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार, व्यवस्था संभालने में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया। इसका असर आम राहगीरों पर पड़ा।
जाम की वजह से स्थानीय निवासी, नौकरीपेशा लोग, महिलाएं, बुजुर्ग और मरीज परेशान होते रहे। सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर रही कि जाम के दौरान एम्बुलेंस (Ambulance) और अन्य जरूरी वाहनों के लिए रास्ता निकालना मुश्किल हो सकता है।
गड्ढामुक्त सड़कों के निर्देश के बावजूद बदहाल रास्ते
कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) को देखते हुए गाजियाबाद प्रशासन ने यातायात व्यवस्था के लिए ट्रैफिक डायवर्जन, पुलिस बल की तैनाती, नियंत्रण कक्ष और वैकल्पिक मार्गों जैसी व्यवस्थाओं का दावा किया था। प्रशासन की ओर से कांवड़ मार्गों को गड्ढामुक्त करने के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद भोपुरा मोड़ से कारण गेट चौकी तक सड़क की खराब स्थिति दिखाई देने से प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने रखीं ये मांगें
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने प्रशासन से सिकंदरपुर चौकी से शालीमार गार्डन मोड़ (Shalimar Garden Turn) तक सड़क की तत्काल मरम्मत कराने और गहरे गड्ढों को भरने की मांग की है। इसके साथ ही जाम वाले स्थानों पर अतिरिक्त यातायात पुलिसकर्मियों की तैनाती और कांवड़ सेवा शिविरों के वॉलंटियरों (Volunteers at Kanwar service camps) को यातायात पुलिस के साथ बेहतर समन्वय के निर्देश देने की मांग की गई है।
लोगों ने एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों (Emergency vehicles) के लिए अलग से रास्ता साफ रखने तथा 19 जुलाई की बैठक में किए गए आश्वासनों की समीक्षा करने की भी मांग की है। नागरिकों का कहना है कि भविष्य में किसी भी धार्मिक यात्रा से पहले सड़क, बैरिकेडिंग, रोशनी और यातायात प्रबंधन की मौके पर जांच सुनिश्चित की जानी बेहद जरूरी है।
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