Poetry Book Launch: राजधानी दिल्ली के पीरागढ़ी में स्थित सिम्फनी बैंक्वेट में रविवार 2 अगस्त 2026 को साहित्य और संस्कृति से जुड़ा एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस साहित्यिक समारोह में कवयित्री माही मुंतज़िर के दूसरे काव्य संग्रह ‘मासूमियत के लिबास’ और कवि ललित मोहन जोशी के पहले ग़ज़ल संग्रह ‘उदासी खा गई’ का भव्य लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकारों, कवियों, समाजसेवियों और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दोनों पुस्तकों का लोकार्पण रामकुमार भगत, ओमवती, डॉ. पुष्पा सिंह विसेन, कृष्ण गोपाल विद्यार्थी, संजय जैन और कुमार राघव के करकमलों के द्वारा किया गया। इस दौरान साहित्य प्रेमियों के बीच दोनों पुस्तकों को लेकर खास उत्साह देखने को मिला।
दोनों कृतियों पर हुई साहित्यिक चर्चा
वहीं, भव्य लोकार्पण के बाद ‘मासूमियत के लिबास’ और ‘उदासी खा गई’ पर समीक्षात्मक चर्चा भी हुई। वक्ताओं ने दोनों रचनाओं की साहित्यिक खूबियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज की भावनाओं, अनुभवों और संवेदनाओं को शब्द देने का काम करता है। दोनों रचनाकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से भावनाओं को प्रभावी तरीके से सामने रखने का प्रयास किया है।
वक्ताओं ने कवयित्री माही मुंतज़िर और कवि ललित मोहन जोशी की रचनात्मकता की सराहना की। साथ ही दोनों साहित्यकारों को उनके आगामी साहित्यिक सफर के लिए शुभकामनाएं भी दी गईं।
साहित्यकारों और अतिथियों का हुआ सम्मान
इस समारोह के दौरान कार्यक्रम में शामिल साहित्यकारों और विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर डॉ. अंजू अग्रवाल ‘उत्साही’, राजरानी भल्ला, उर्वी ऊदल, मधु, एकता चौहान, रजनी बाला, एडवोकेट मयंक शर्मा, एडवोकेट प्रियंक शर्मा, वीरेंद्र राय, कुमार राघव, ईशा मालू, संदीप सोनी, मुरारी मंडल, साहिल सन्यासी, निखिल चौधरी, जितेंद्र जीत, सिद्धार्थ और नासिर सहित कई साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन मौजूद रहे।
कार्यक्रम में साहित्य के साथ-साथ समाज और संस्कृति से जुड़े लोगों की मौजूदगी ने आयोजन को और खास बना दिया। अतिथियों ने साहित्य के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि आज के दौर में भी कविता, ग़ज़ल और साहित्य लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम कर रहे हैं।

नवयुवा कवियों ने पेश कीं अपनी रचनाएं
समारोह में उभरते हुए युवा कवियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। नवयुवक कवियों ने अपनी प्रभावशाली कविताओं का काव्य-पाठ किया, जिसे श्रोताओं ने खूब पसंद किया। उनकी प्रस्तुतियों पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उत्साह बढ़ाया।
युवा कवियों की प्रस्तुतियों ने समारोह में नई ऊर्जा भर दी। इससे यह भी देखने को मिला कि नई पीढ़ी के बीच कविता और साहित्य को लेकर रुचि लगातार बनी हुई है।
साहित्य और संस्कृति के रंग में रंगा रहा समारोह
कार्यक्रम का संचालन संदीप सोनी ने प्रभावशाली तरीके से किया। पूरे आयोजन के दौरान साहित्य, कविता, ग़ज़ल और संस्कृति के प्रति समर्पण का माहौल नजर आया। कार्यक्रम में मौजूद साहित्य प्रेमियों ने दोनों पुस्तकों के लोकार्पण को साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया।
अंत में आयोजकों की ओर से सभी अतिथियों, साहित्यकारों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया गया। सौहार्दपूर्ण माहौल में कार्यक्रम का समापन हुआ।
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