NCERT Apology: बच्चों की पढ़ाई को लेकर NCERT की किताबों में ऐसे कई अध्याय है, जो कई तरह के विवादों से जुड़े होते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें शामिल किया गया है। इसी क्रम में अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की एक किताब में शामिल विवादित चैप्टर को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। परिषद ने इस मामले में बिना शर्त और पूर्ण क्षमा याचना की है। साथ ही इस मामले से संबंधित किताब को बाजार से भी वापस मंगा लिया गया है।
वही, एनसीईआरटी ने इस बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक आधिकारिक बयान भी जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि हाल ही में कक्षा 8 के लिए सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक “समाज की खोज: भारत और उससे परे” (भाग-II) प्रकाशित की गई थी। इस किताब में अध्याय IV “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शीर्षक से शामिल किया गया था।
अध्याय को लेकर उठे थे सवाल
किताब के इस चैप्टर को लेकर कई लोगों और संगठनों ने आपत्ति जताई थी। मिली जानकारी के अनुसार, अध्याय में न्यायपालिका से जुड़े कुछ ऐसे संदर्भ थे, जिन पर विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद इस मामले पर चर्चा तेज हो गई और कई लोगों ने एनसीईआरटी से स्पष्टीकरण भी मांगा है। जैसे- जैसे विवाद बढ़ा एनसीईआरटी ने भी इस पूरे मामले की समीक्षा की और फिर बाद में परिषद ने फैसला लिया कि विवादित अध्याय को किताब से हटा दिया जाएगा।

पूरी किताब बाजार से वापस ली गई
एनसीईआरटी ने अपने बयान में यह भी कहा कि परिषद के निदेशक और सभी सदस्यों ने इस अध्याय को लेकर बिना शर्त के माफी भी मांगी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि कक्षा 8 की यह पूरी पुस्तक वापस ले ली गई है और फिलहाल यह कहीं भी उपलब्ध नहीं है। परिषद ने कहा कि छात्रों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों को हुई किसी भी असुविधा के लिए उन्हें बेहद खेद है।
NCERT tweets, "The National Council of Educational Research and Training [NCERT] has recently published a social science textbook, “Exploring Society: India and Beyond," Grade 8 (Part II), which contained Chapter IV titled “The Role of Judiciary in our Society." The Director and… pic.twitter.com/omElzTF3Ar
— ANI (@ANI) March 10, 2026
नए संस्करण में नहीं होगा विवादित चैप्टर
एनसीईआरटी के अनुसार, किताब के नए संस्करण में यह विवादित चैप्टर शामिल नहीं किया जाएगा। परिषद का कहना है कि भविष्य में पाठ्यपुस्तकों की सामग्री को लेकर और अधिक सावधानी बरती जाएगी ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
शिक्षा क्षेत्र में चर्चा हुई तेज
इस मामले की तेजी के बाद से शिक्षा क्षेत्र में इस विषय को लेकर चर्चा काफी अधिक शुरू होने लगी है। इस संदर्भ में कई शिक्षाविदों का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों में शामिल सामग्री को प्रकाशित करने से पहले उसकी गहन समीक्षा जरूर करनी चाहिए, ताकि छात्रों से हाथों में जब किताब जाएं, तो वह सही हो। क्योंकि ये किताबें लाखों छात्रों की पढ़ाई का हिस्सा होती हैं।
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