सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp और Meta को जारी किया नोटिस, कहा– नागरिकों की प्राइवेसी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

SC On WhatsApp And Meta

SC On WhatsApp And Meta: सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp और Meta (पहले Facebook) को सख्त चेतावनी दी थी कि वह डेटा साझा करने के नाम पर वे भारत के नागरिकों की निजता के अधिकार से खिलवाड़ कर रहे हैं, जो सही नहीं है, इसका अधिकार हम नहीं दे सकते है। ऐसे में कोर्ट ने कंपनियों की पॉलिसी समेत डेटा संग्रहण के तरीकों पर कड़ी आपत्ति जताई है।

कंपनियों को छोड़ना होगा भारत

इस विषय पर सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम मेटा के साथ किसी भी जानकारी को साझा करने की अनुमति नहीं देंगे। हम आपको देश की प्राइवेसी के साथ खेलने की इजाजत नहीं देंगे। WhatsApp और Meta डेटा शेयर नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि देश के संविधान का उल्लंघन करना बिल्कुल भी स्वीकार् नहीं होगा और अगर कंपनियां इस नियम का पालन के लिए तैयार नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत भारत छोड़ देना चाहिए।

WhatsApp और Meta करेंगे दाखिल हलफनामा

सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp और Meta से हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें स्पष्ट रूप से यह लिखा हो कि वे भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा किसी भी स्थिति में साझा नहीं करेंगे। अगर एफिडेविट दाखिल नहीं किया गया, तो उनकी अपील पर सुनवाई नहीं होगी और मामले को तुरंत खारिज कर दिया जाएगा।

वही, कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि कंपनियों ने अपने टर्म्स और कंडीशन्स ऐसे तैयार किए हैं, जिन्हें आम उपभोक्ता समझ ही नहीं सकता।

WhatsApp-Meta पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार
WhatsApp-Meta पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

डेटा शेयरिंग करना है चोरी

सुप्रीम कोर्ट ने डेटा शेयरिंग को “चोरी के समान” बताया है और साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी के व्यापारिक हित के लिए भारतीय नागरिकों की निजी जानकारी से समझौता स्वीकार्य नहीं है। दरअसल, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट सिर्फ प्राइवेसी की बात ही नहीं करता हैं, बल्कि वह यह भी देखता है कि डेटा का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए हो रहा है। कोर्ट ने ऑनलाइन विज्ञापन के लिए डेटा का उपयोग करना गंभीर मामला बताया है।

WhatsApp एक तरह से मैसेजिंग सेवा है,यह न कि डेटा इकट्ठा करने और बेचने का प्लेटफॉर्म है। CJI सूर्यकांत ने साफ कहा है कि अगर कंपनियां भरोसा नहीं दिलाती हैं कि वे डेटा शेयर नहीं करेंगी, तो उनकी अपील पर आगे की सुनवाई नहीं होगी।

अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी

बताया जा रहा है कि इस मामले में अगला आदेश 9 फरवरी, सोमवार को सुनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले से यह साफ कर दिया है कि भारत के कानून और संविधान का पालन करना उनका पहला अनिवार्य कर्तव्य है।

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