TMC Rebel MPs List: टीएमसी में बगावत की अटकलें तेज, सयानी घोष और शत्रुघ्न सिन्हा समेत 20 सांसदों के नाम चर्चा में

TMC Rebel MPs List

TMC Rebel MPs List: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर कथित तौर पर असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक ऐसी सूची चर्चा का विषय बन गई है, जिसमें टीएमसी के 19 सांसदों को “बागी” बताया जा रहा है। इस सूची में कई बड़े और चर्चित नेताओं के नाम शामिल होने का दावा किया जा रहा है।

हालांकि, इस कथित सूची को लेकर अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद सूची में शामिल नामों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं और विपक्ष भी इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए है।

यूसुफ पठान का नाम आने से बढ़ी चर्चा

कथित बागी सांसदों की सूची में पूर्व भारतीय क्रिकेटर और टीएमसी नेता यूसुफ पठान का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। हाल ही में राजनीति में सक्रिय हुए यूसुफ पठान पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। उनका नाम सामने आने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे टीएमसी के लिए बड़ा संकेत माना है।

यूसुफ पठान के अलावा कूच बिहार से सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया, जंगीपुर से खली उर रहमान और मुर्शिदाबाद से अबू ताहिर खान का नाम भी कथित सूची में बताया जा रहा है।

युवा नेतृत्व की नेता सयानी घोष भी सूची में

टीएमसी की युवा और लोकप्रिय नेता सयानी घोष का नाम भी इस सूची में शामिल होने की चर्चा है। जादवपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली सयानी घोष पार्टी के युवा चेहरों में प्रमुख मानी जाती हैं। इसके अलावा बैरकपुर से सांसद पार्थ भौमिक और मथुरापुर से सांसद बापी हलधर के नाम भी कथित रूप से सामने आए हैं। इन नामों के चर्चा में आने से पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलों को और बल मिला है।

काकोली घोष और अन्य सांसदों के नाम भी चर्चा में

बरासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार का नाम भी कथित बागी नेताओं की सूची में बताया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि इस तरह की खबरों में सच्चाई होती है तो यह पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन सकता है। इसके अलावा झाड़ग्राम से सांसद कालीपद सोरेन और मेदिनीपुर से सांसद जून मालिया का नाम भी इस सूची में शामिल बताया जा रहा है।

शत्रुघ्न सिन्हा का नाम आने से बढ़ी सियासी हलचल

बॉलीवुड अभिनेता और आसनसोल से टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है। शत्रुघ्न सिन्हा राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े राजनीतिक और फिल्मी चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। उनके अलावा बांकुरा से सांसद अरूप चक्रवर्ती और वर्धमान पूर्व से सांसद शर्मिला सरकार का नाम भी कथित सूची में शामिल बताया जा रहा है।

शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी के नाम भी शामिल

टीएमसी की वरिष्ठ नेता और बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय का नाम भी इस सूची में सामने आया है। शताब्दी रॉय लंबे समय से पार्टी से जुड़ी हुई हैं और पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनकी अलग पहचान है। इसके अलावा आरामबाग से सांसद मिताली बाग और हुगली से सांसद रचना बनर्जी का नाम भी चर्चा में है। दोनों नेताओं के नाम सामने आने के बाद राजनीतिक अटकलों का दौर और तेज हो गया है।

माला रॉय समेत कई सांसदों के नाम चर्चा में

कथित सूची में कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। इसके अलावा घाटल से सांसद दीपक अधिकारी और बोलपुर से सांसद असित कुमार मॉल के नाम भी सामने आए हैं। इन सभी नामों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

पार्टी की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया

अब तक तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस कथित सूची पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर कई तरह की अपुष्ट जानकारियां वायरल होती रहती हैं और बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर टीएमसी पर निशाना साध रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

क्या है राजनीतिक महत्व?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। ऐसे में पार्टी के कई सांसदों के नाम किसी कथित बागी सूची में आने की खबर राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, जब तक पार्टी या संबंधित सांसदों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक इन दावों को केवल राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जाएगा।

फिलहाल, सभी की निगाहें टीएमसी नेतृत्व और सूची में शामिल बताए जा रहे सांसदों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई है और इसका पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है।

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