बंगाल में चुनावी हार के बाद TMC को बड़ा झटका, 100 पार्षदों ने छोड़ी पार्टी, जानें क्यों

विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजरती नजर आ रही है। पार्टी के अंदर नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि 100 से ज्यादा पार्षदों ने अलग-अलग नगर पालिकाओं से इस्तीफा दे दिया है। यह मामला सिर्फ कुछ नेताओं की नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि अब TMC की जमीनी पकड़ भी कमजोर होती दिख रही है। उत्तर 24 परगना से लेकर कांथी और डायमंड हार्बर तक कई जगहों पर पार्टी के नेता और पार्षद खुलकर विरोध में उतर आए हैं। इस पूरे विवाद के बीच ममता बनर्जी ने भी साफ शब्दों में कह दिया कि जो लोग मुश्किल समय में पार्टी के साथ नहीं रह सकते, वे अपना रास्ता चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

उत्तर 24 परगना से शुरू हुआ बड़ा विद्रोह

टीएमसी के लिए सबसे बड़ा झटका उत्तर 24 परगना जिले से आया। यहां कई नगर पालिकाओं में पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफे देकर पार्टी नेतृत्व को बड़ा संदेश दिया है। हालीशहर नगरपालिका में 23 में से 16 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया। इसके बाद भाटपाड़ा में चेयरमैन रेबा साहा समेत 30 पार्षदों ने पार्टी छोड़ दी। यही नहीं, कांचरापाड़ा में 14, गारुलिया में 18 और उत्तर बैरकपुर में 15 पार्षदों ने भी विद्रोह का रास्ता चुन लिया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर इस्तीफे दिखाते हैं कि पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा।

डायमंड हार्बर में भी TMC को झटका

डायमंड हार्बर को लंबे समय से TMC का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन अब यहां भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। यहां 16 में से 8 पार्षदों ने पार्टी से दूरी बना ली है। माना जा रहा है कि इससे स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है। डायमंड हार्बर में इस तरह की स्थिति सामने आने के बाद विपक्ष भी लगातार हमला बोल रहा है।

आखिर क्यों नाराज हैं पार्षद ?

इस्तीफा देने वाले कई पार्षदों का कहना है कि अब उनके पास कोई असली ताकत नहीं बची थी। उनका आरोप है कि पिछले कुछ सालों में स्थानीय स्तर पर फैसले लेने की आजादी खत्म हो गई थी। हर निर्णय ऊपर से लिया जा रहा था, जिससे जमीनी नेताओं में नाराजगी बढ़ती चली गई। इसके अलावा भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण के मामलों को लेकर भी डर का माहौल बताया जा रहा है। बीजेपी सरकार बनने के बाद कई पार्षदों को आशंका है कि उनके पुराने कामों की जांच हो सकती है। इसी वजह से कई लोग समय रहते खुद को अलग करने की कोशिश कर रहे हैं।

ममता बनर्जी का सख्त संदेश

बढ़ते विवाद के बीच ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं और पार्षदों की आपात बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने कहा कि मुश्किल वक्त में पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रहना चाहिए। लेकिन जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे अपना फैसला लेने के लिए आजाद हैं। ममता के इस बयान को काफी सख्त माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान पार्टी के अंदर बढ़ते दबाव को भी दिखाता है।

कई नगर पालिकाओं में अल्पमत में पहुंची TMC

इतने बड़े स्तर पर इस्तीफों का असर अब नगर पालिकाओं में भी दिखने लगा है। कई जगहों पर TMC के निर्वाचित बोर्ड अल्पमत में आ गए हैं। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार वहां प्रशासक नियुक्त कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो स्थानीय प्रशासन पर सीधा असर पड़ सकता है। जनता के बीच भी यह संदेश जा रहा है कि पार्टी के अंदर स्थिरता नहीं बची है।

कोलकाता नगर निगम में भी बढ़ा तनाव

सिर्फ छोटे शहरों में ही नहीं, बल्कि कोलकाता नगर निगम यानी KMC में भी माहौल तनावपूर्ण बताया जा रहा है। खबरों के मुताबिक, KMC के भवन और मूल्यांकन विभाग ने अभिषेक बनर्जी से जुड़ी संपत्तियों को नोटिस भेजे हैं। इससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। वहीं मेयर फिरहाद हकीम भी नगर निगम की बैठक रद्द होने को लेकर नाराज नजर आए। बताया गया कि मीटिंग रूम में ताला लगा दिया गया था, जिसके बाद प्रतीकात्मक बैठक करनी पड़ी। बीजेपी ने इस मुद्दे पर TMC पर जमकर निशाना साधा है।

बीजेपी ने साधा निशाना

बीजेपी लगातार इस पूरे मामले को लेकर TMC पर हमला बोल रही है। प्रदेश मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि TMC की अंदरूनी लड़ाई का नुकसान जनता को उठाना पड़ रहा है। उनके मुताबिक पार्षदों के इस्तीफों से कई नगर पालिकाओं में कामकाज प्रभावित हो गया है। बीजेपी का कहना है कि TMC नेता जनता की समस्याएं हल करने की बजाय अपनी राजनीति बचाने में लगे हुए हैं।

क्या बंगाल की राजनीति बदलने वाली है ?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर TMC जल्द हालात नहीं संभालती, तो आने वाले समय में पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है।इतने बड़े स्तर पर नेताओं और पार्षदों की नाराजगी का असर अगले चुनावों में भी दिख सकता है। विपक्षी पार्टियां इस मौके को अपने लिए बड़ा अवसर मान रही हैं। ममता बनर्जी अभी भी बंगाल की सबसे बड़ी नेता मानी जाती हैं, लेकिन पार्टी  के अंदर बढ़ता असंतोष उनके लिए चुनौती बनता जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में TMC इस समय गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रही है। 100 से ज्यादा पार्षदों के इस्तीफे, नेताओं की नाराजगी और नगर पालिकाओं में बढ़ती अस्थिरता ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या TMC इस संकट से बाहर निकल पाएगी या बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में पूरे राज्य की नजर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के अगले कदम पर टिकी रहेगी।

Recent Posts