SC ने लगाई UGC के नए नियमों पर अस्थायी रोक, CJI ने कहा-जाति आधारित भेदभाव से हो सकता दुरुपयोग

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कमेटी गठन का आदेश दिया

UGC New Rules Supreme Court: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियम को लेकर देशभर में पिछले कुछ दिनों से विरोध चल रहा था, जिसपर आज सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, इस मामले की सुनवाई करते समय सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नियमों के अमल पर फिलहाल के लिए पूरी तरह से रोक लगा दी है।

बता दें कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने इस मामले में कहा कि रेगुलेशन के इस्तेमाल का दुरुपयोग किया जा सकता है। ऐसे में कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर फिर से नए सिरे से विचार के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिए हैं।

UGC के नए नियमों पर कोर्ट ने लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या हम फिर से एक बारि फिर 75 साल बाद जाति आधारित समाज की ओर लौट रहे हैं। क्या एक देश के रूप में हम जो उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं, उन्हें पीछे छोड़कर एक प्रतिगामी दिशा में जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि वह एक उच्च स्तरीय समिति का गठन (Constitution of a high-level committee) करें और उसमें यह तय किया जाएगा कि कैसे सभी वर्गों के साथ न्याय हो, विकास भी हो और किसी तरह का भेदभाव न हो सके। जब तक समिति अपनी रिपोर्ट नहीं दे देती, तब तक UGC के नए नियमों पर पूरी तरह से रोक लगी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने दुरुपयोग रोकने के लिए कदम उठाया
सुप्रीम कोर्ट ने दुरुपयोग रोकने के लिए कदम उठाया

UGC के नए नियम (New UGC Rules)

UGC ने 13 जनवरी को देश के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए नए नियमों को जारी कर दिया था। इन नियमों ने हर शिक्षण संस्थान में Equity Center, Equity Squad और Equity Committee अनिवार्य कर दिया था।

इन नए नियमों के तहत शैक्षणिक परिसरों (Educational Campuses) में भेदभाव से जुड़ी शिकायतों का सही से निपटारा करना है, जिसमें खासतौर पर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), दिव्यांग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया था।

क्यों जरूरी था UGC का नया नियम?

UGC का तर्क है कि सरकार का यह कदम इसलिए बेहद जरूरी माना जा रहा था क्योंकि साल 2020 से 2025 के बीच पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों में 100% से अधिक मिली थी। ऐसे में UGC के नए नियमों में 24×7 हेल्पलाइन की व्यवस्था और सख्त प्रावधान शामिल किए गए थे।

सरकार ने साफ तौर पर कहा गया था कि अगर कोई भी इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है या उनका फंड पूरी तरह से रोका जा सकता है।

कई वर्गों के समाज ने जताई नाराजगी

पिछले कुछ दिनों से इन नियमों को लेकर सवर्ण समाज के एक बड़े वर्ग में नाराजगी जताई और साथ ही उन्होंने 1 फरवरी को धरना प्रदर्शन करने का भी ऐलान किया था। बताया जा रहा है कि इस नियम को लेकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित कई राज्यों में जोरदार प्रदर्शन हुए, साथ ही सोशल मीडिया पर भी इस नियम की अवहेलना की गई।

नियमों का विरोध करने वालों का आरोप था कि ये सभी नियम समाज में नई दूरियां और खाइयां पैदा करेंगे। इन नियमों का कुछ लोग हल इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसमें किसी को भी तरह के झूठे आरोपों में फंसाना आसान हो सकता है।

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