Trump Tariffs: अमेरिका के राष्ट्रपति के द्वारा भारत समेत कई देशों पर लगाएं गए टैरिफ पिछले काफी समय से खबरों में बना हुआ है। इस मामले पर अब अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने अपने हाथों में ले लिया है। दरअसल, अमेरिका सुप्रीम कोर्ट ने आज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कुछ टैरिफ पर रोक लगा दी है।
बता दें कि अमेरिकी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद घोषणा की अब 24 फरवरी 2026 से इन टैरिफ की वसूली को बंद कर दी जाएगी। ऐसे में अमेरिका के कोर्ट का यह फैसला व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गहरा असर डाल सकता है।
ट्रंप के टैरिफ का मुख्य उद्देश्य
ट्रंप की सरकार ने विदेशी सामानों पर भारी टैरिफ लगाया था। इसका मकसद अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देना और विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित बनाए रखने के लिए था और साथ ही अमेरिका को मुनाफा पहुंचाना था। खबरों के अनुसार, प्रशासन ने इसके लिए आपातकालीन कानून का सहारा लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया रोक?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि जिस कानून के तहत ये टैरिफ लगाए गए थे, उसमें राष्ट्रपति को इस तरह का कोई अधिकार नहीं था। कोर्ट के अनुसार, टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास नहीं है। इस फैसले के बाद अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी ने अपने सिस्टम से इन टैरिफ से जुड़े सभी कोड हटा दिए हैं। इसका अर्थ है कि 24 फरवरी से इन टैरिफ की वसूली बंद हो जाएगी।
मिली जानकारी के अनुसार, यह रोक केवल उन्हीं टैरिफ पर लागू होगी जिन्हें कोर्ट ने अवैध माना है। राष्ट्रीय सुरक्षा या चीन से जुड़े अन्य टैरिफ अब भी लागू रहेंगे।

टैरिफ रोक का आर्थिक असर
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के इन टैरिफ से अमेरिका को अब तक अरबों डॉलर की आमदनी को काफी बढ़ा दिया है। अब यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या कंपनियों को पहले वसूले गए टैरिफ के पैसे वापस किए जाएंगे। इस पर आगे कानूनी प्रक्रिया हो सकती है।
यह भी बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। अनुमान है कि कई देशों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है, जबकि कुछ विश्लेषक मानते हैं कि इससे अमेरिकी नीति में अनिश्चितता बढ़ सकती है।
व्यवसाय और वैश्विक बाजार पर प्रभाव
अमेरिकी कंपनियों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। क्योंकि अब से उन्हें किसी भी तरह के विदेशी सामानों पर अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। वैश्विक बाजार में भी अमेरिकी व्यापार नीति में यह बदलाव नजर आएगा। निवेशक और व्यवसाय अब अमेरिकी टैरिफ नीतियों के प्रति अधिक सतर्क रहेंगे।
देखा जाए तो सुप्रीम कोर्ट का यह अहम फैसला अमेरिकी राजनीति के लिए भी बेहद खास माना जा रहा है। जो साफ-साफ दिखाता है कि राष्ट्रपति के पास व्यापार नीतियों पर असीम अधिकार नहीं हैं। आने वाले समय में यह फैसला अमेरिकी नीति और चुनावी प्रक्रिया में एक तरह से चर्चा का विषय बन जाएगा।
ये भी पढ़ें: देश के इन राज्यों में आज भारी बारिश का अलर्ट, जानें अपने शहर का हाल






